बिहार टेंडर घोटाला: रिशु श्री के राजदार संतोष ने उगले राज, इस IAS तक पहुंची जांच की आंच!

बिहार में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने टेंडर माफिया रिशु श्री के डमी डायरेक्टर संतोष कुमार को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में 125 करोड़ के टेंडर, फर्जी बिल और तत्कालीन IAS संजीव हंस से जुड़े रिश्वत नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है।

Tender Mafia Rishu Shree dummy Santosh Kumar Arrested
बिहार टेंडर घोटाला: माफिया रिशु श्री का पार्टनर संतोष कुमार गिरफ्तार, खुले कई राज!- फोटो : news 4 nation

स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए टेंडर माफिया रिशु श्री के सबसे करीबी राजदार और सहयोगी संतोष कुमार को पटना के मीठापुर इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, संतोष पिछले 15 वर्षों से रिशु श्री के वित्तीय और कारोबारी साम्राज्य का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा था और उसकी काली कमाई को ठिकाने लगाने का काम देखता था। दोनों का संबंध वर्ष 2010 से है, जब रिशु डस्टबिन सप्लाई का काम करता था; समय के साथ भरोसा बढ़ने पर संतोष को रिशु की कई शेल कंपनियों में 'डमी डायरेक्टर' बना दिया गया था।


रिश्वत का खेल और फर्जी बिलों से नकदी जुटाने का तरीका

SVU की पूछताछ में संतोष कुमार ने स्वीकार किया है कि उसका मुख्य काम अधिकारियों तक रिश्वत की रकम पहुंचाना और रिशु श्री के लिए बेनामी संपत्तियों का इंतजाम करना था। जांच में खुलासा हुआ है कि रिशु श्री की कंपनी ‘मातृस्वा कंस्ट्रक्शन’ में फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर खर्च दिखाए जाते थे और वाहनों के ईंधन (फ्यूल) के फर्जी बिल तैयार किए जाते थे। इन फर्जी खर्चों के जरिए बैंक खातों से बड़ी मात्रा में नकदी (कैश) निकाली जाती थी, जिसका इस्तेमाल आगे चलकर अधिकारियों और इंजीनियरों को रिश्वत देने के लिए किया जाता था।


जल संसाधन विभाग में 125 करोड़ का टेंडर घोटाला और साजिश

इस पूरे मामले में 125 करोड़ रुपये के एक भारी-भरकम टेंडर घोटाले का भी पर्दाफाश हुआ है। आरोप है कि जल संसाधन विभाग में अपने ऊंचे रसूख और प्रभाव का इस्तेमाल कर सुपौल के बीरपुर स्थित फिजिकल मॉडलिंग सेंटर से जुड़े इस टेंडर को पहले अहमदाबाद की एक कंपनी ‘शेवरॉक्स’ को दिलाया गया। इसके बाद एक सोची-समझी साजिश के तहत, सब-कॉन्ट्रैक्ट के जरिए इस पूरे काम को रिशु श्री की कंपनी ‘मातृस्वा कंस्ट्रक्शन’ को सौंप दिया गया, जिसमें संतोष कुमार डमी डायरेक्टर के पद पर तैनात था।


IAS संजीव हंस की केंद्रीय भूमिका और कमीशन का बहीखाता

SVU इस पूरे मामले की जांच एफआईआर संख्या 5/25 के तहत कर रही है और एजेंसी का दावा है कि इस पूरे कथित घोटाले के केंद्र में तत्कालीन जल संसाधन विभाग के सचिव और IAS अधिकारी संजीव हंस हैं। जांच में पवन कुमार नाम के एक अन्य व्यक्ति की भूमिका भी उजागर हुई है, जो अधिकारियों को बांटे जाने वाले 2 प्रतिशत से लेकर 10 प्रतिशत तक के कथित कमीशन का पूरा लिखित हिसाब-किताब रखता था।


मोबाइल से मिले गोपनीय दस्तावेज और महिला को 20 लाख का भुगतान

जांच एजेंसी को मुख्य आरोपी रिशु श्री के मोबाइल फोन से कई अत्यंत गोपनीय सरकारी दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिसके बाद SVU यह पता लगाने में जुटी है कि ये सरकारी कागजात उस तक कैसे पहुंचे। इसके अलावा, मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ आया है; SVU के मुताबिक, एक महिला का मुंह बंद रखने के लिए रिशु श्री की कंपनी के खाते से 20 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे और यह गुप्त भुगतान कथित तौर पर तत्कालीन IAS संजीव हंस के इशारे पर किया गया था।


रिमांड पर लेने की तैयारी और आगे की बड़ी कार्रवाई

संतोष कुमार की इस गिरफ्तारी को बिहार के प्रशासनिक और ठेकेदारी गलियारे में एक बहुत बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। पूछताछ में मिले इन बड़े इनपुट्स के बाद जांच का दायरा काफी बढ़ गया है और SVU अब संतोष कुमार को अदालत से रिमांड पर लेकर आगे की कड़ी पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। एजेंसी को पूरी उम्मीद है कि रिमांड के दौरान टेंडर, रिश्वतखोरी और बेनामी संपत्तियों के इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े कई और रसूखदार चेहरों के नाम सामने आ सकते हैं।