Bihar Assembly Monsoon Session:मानसून सत्र आज से होगा आगाज, 100 दिन की सरकार पर विपक्ष का करेगा सियासी वार, सदन में गूंजेंगे कानून-व्यवस्था, एनकाउंटर और बेरोजगारी के सवाल
Bihar Assembly Monsoon Session:सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का यह पहला मानसून सत्र है और इसी दौरान सरकार अपने 100 दिन भी पूरे कर रही है।
Bihar Assembly Monsoon Session: बिहार विधानमंडल का पांच दिवसीय मानसून सत्र आज यानी सोमवार से शुरू हो रहा है। 24 जुलाई तक चलने वाला यह सत्र सियासी लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का यह पहला मानसून सत्र है और इसी दौरान सरकार अपने 100 दिन भी पूरे कर रही है। ऐसे में सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों का ब्यौरा पेश करने की तैयारी में है, तो वहीं विपक्ष सरकार को कानून-व्यवस्था, बेरोज़गारी, विकास योजनाओं और चर्चित मामलों को लेकर कठघरे में खड़ा करने की पूरी रणनीति बना चुका है। माना जा रहा है कि सदन के भीतर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक, तल्ख़ तकरार और ज़ोरदार हंगामे के आसार हैं।
आज यानी सोमवार सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुरू होगी। पहले दिन दिवंगत विधायकों और विधान पार्षदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इसके बाद वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट सदन के पटल पर रखेंगे। इसके साथ ही महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट, विभिन्न विभागों की अनुदान मांगें और अन्य विधायी कार्य भी सदन में प्रस्तुत किए जाएंगे।सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी दलों से लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने और प्रश्नकाल को बाधित नहीं करने की अपील की है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि विपक्ष सरकार को किसी भी कीमत पर राहत देने के मूड में नहीं है।
दरअसल, 15 अप्रैल को शपथ लेने वाली सम्राट सरकार के 100 दिन पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे में सत्ता पक्ष विकास योजनाओं, आधारभूत संरचना, निवेश, रोजगार सृजन और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का रिपोर्ट कार्ड पेश करेगा। वहीं विपक्ष इस दावे की परतें खोलने की कोशिश करेगा और ज़मीनी हकीकत का हवाला देकर सरकार को घेरने का प्रयास करेगा।
सबसे बड़ा मुद्दा राज्य की कानून-व्यवस्था रहने की संभावना है। विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि अपराध की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है और सरकार हालात संभालने में नाकाम रही है। भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला भी सदन में ज़ोर-शोर से उठ सकता है। 7 जून को पुलिस कार्रवाई में घायल हुए भरत तिवारी की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। विवाद बढ़ने पर सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए और पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा इसकी जांच कर रहे हैं। विपक्ष इस पूरे प्रकरण में सरकार की भूमिका और पुलिस कार्रवाई पर सवालों की बौछार कर सकता है।
इसके अलावा रिशु श्री मामला, बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास योजनाओं की रफ़्तार और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे भी विपक्ष के तरकश के अहम तीर होंगे। संजीव हंस, पवन कुमार, मुमुक्षु चौधरी, तारणी दास समेत कई अधिकारियों के खिलाफ दायर चार्जशीट को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जा सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को सुशासन के दावों से जोड़ते हुए सत्ता पक्ष पर निशाना साधने की तैयारी में है।
सियासी जानकारों का मानना है कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर एनडीए के भीतर भी अलग-अलग राय देखने को मिल सकती है। कुछ सत्तारूढ़ विधायक भी अपने क्षेत्रों की समस्याओं और अपराध की घटनाओं को लेकर सरकार के सामने असहज सवाल उठा सकते हैं, जिससे सदन की कार्यवाही और अधिक दिलचस्प हो सकती है।
कुल मिलाकर, मानसून सत्र केवल विधायी कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सरकार के 100 दिनों के कामकाज की सियासी परीक्षा भी बनेगा। एक ओर सत्ता पक्ष उपलब्धियों की तस्वीर पेश करेगा, तो दूसरी ओर विपक्ष सवालों की धार से सरकार की घेराबंदी करेगा। ऐसे में अगले पांच दिन बिहार की सियासत का रुख तय करने वाले और सदन के भीतर तीखे राजनीतिक मुकाबले के गवाह बनने वाले हैं।