अब दिल्ली दूर नहीं, गंगा और शामली एक्सप्रेसवे से जुड़ा बिहार, अब महज 15 घंटे में पूरा होगा पटना, गया और बेतिया से दिल्ली का सफर, आठ जिला के लोग होंगे बमबम

Bihar road travel Delhi: एक्सप्रेसवे के नए नेटवर्क गंगा एक्सप्रेसवे और शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन और निर्माण से बिहार के लोगों के लिए दिल्ली का सफर बेहद आसान होने जा रहा है।...

Bihar Linked via Ganga  Shamli Expressway Delhi in 15 Hours
अब महज 15 घंटे में पूरा होगा पटना, गया और बेतिया से दिल्ली का सफर- फोटो : social Media

Bihar road travel Delhi: यूपी में बन रहे और उद्घाटित हो रहे मेगा एक्सप्रेसवे अब सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि बिहार और दिल्ली के बीच दूरी को पाटने वाली नई सियासी-आर्थिक धमनियाँ बनते जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 अप्रैल को उद्घाटित 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे ने खासकर दक्षिण बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जैसे जिलों के लिए राजधानी दिल्ली की राह को बेहद आसान कर दिया है।

यह एक्सप्रेसवे वाराणसी-प्रयागराज होते हुए मेरठ और फिर दिल्ली तक सीधा और तेज कनेक्शन देता है, जहां वाहनों की रफ्तार 120 किमी प्रति घंटा तक संभव है। इसका असर यह है कि अब गया से दिल्ली जैसे सफर, जो पहले घंटों का नहीं बल्कि थकाने वाला सफर माना जाता था, वह अपेक्षाकृत सुगम और तेज हो गया है। दूसरी तरफ शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण भी उत्तर बिहार के लिए उम्मीदों की नई बिसात बिछा रहा है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मोतिहारी जैसे जिलों के लोगों के लिए यह कॉरिडोर भविष्य में दिल्ली पहुंच को लगभग 12 घंटे के भीतर संभव बना सकता है। करीब 700 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन एक्सप्रेसवे आगे चलकर 8-लेन तक विस्तार की क्षमता रखता है और इसे NHAI द्वारा भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा है।

बिहार के लिए यह सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास नहीं, बल्कि रोजगार, पलायन और व्यापार की दिशा बदलने वाला परिवर्तन माना जा रहा है। बेतिया से दिल्ली की यात्रा अब गोरखपुर-सिलीगुड़ी कॉरिडोर, शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के नेटवर्क से जुड़कर लगभग 15 घंटे में पूरी हो सकेगी।

इस पूरे हाईवे नेटवर्क की खासियत यह है कि यह एक्सेस-कंट्रोल्ड सिस्टम पर आधारित है, यानी प्रवेश और निकास के तय पॉइंट होंगे, जिससे तेज रफ्तार और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की जा सकेगी।

पूर्वी भारत के आठ जिलों पश्चिम चंपारण से किशनगंज तक के लिए यह कॉरिडोर किसी लाइफलाइन से कम नहीं होगा। खासकर उन लाखों युवाओं के लिए जो रोजगार की तलाश में दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की ओर रुख करते हैं, यह सड़कें एक नए भविष्य का रास्ता खोल सकती हैं।कुल मिलाकर, एक्सप्रेसवे का यह जाल अब सिर्फ कंक्रीट का नेटवर्क नहीं रहा, बल्कि बिहार के सामाजिक-आर्थिक नक्शे को बदलने वाली नई रफ्तार बन चुका है जहां दिल्ली अब सचमुच दूर नहीं रह गई है।