Bihar EV Policy 2026: बिहार में EV क्रांति की तैयारी! 45 मिनट में चार्ज होगी कार, पटना समेत इन जिलों में बनेंगे फास्ट चार्जिंग स्टेशन
Bihar EV Policy 2026: बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार बढ़ाने और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने की दिशा में राज्य सरकार ने चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार की तैयारी तेज कर दी है।...
Bihar EV Policy 2026: बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार बढ़ाने और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने की दिशा में राज्य सरकार ने चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार की तैयारी तेज कर दी है। अब राज्य में इलेक्ट्रिक बसों से लेकर निजी दोपहिया, तिपहिया और चार पहिया वाहनों तक के लिए चार्जिंग की सुविधा मजबूत की जा रही है। परिवहन विभाग के मुताबिक, पूर्णिया में चार्जिंग स्टेशन का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और गया जी में निर्माण कार्य जारी है। सबसे खास बात यह है कि पटना के प्रमुख सरकारी परिसरों में स्थापित होने वाले फास्ट डीसी चार्जिंग स्टेशन पर इलेक्ट्रिक कार को लगभग 45 से 60 मिनट में चार्ज किया जा सकेगा।
ई-बसों के लिए हर डिपो में लगेंगे 8 चार्जिंग प्वाइंट
राज्य में सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक बनाने के लिए बस डिपो में भी चार्जिंग व्यवस्था विकसित की जा रही है। परिवहन विभाग के अनुसार, 50 बसों की क्षमता वाले प्रत्येक डिपो में आठ-आठ चार्जिंग प्वाइंट लगाए जा रहे हैं। इनकी मदद से एक इलेक्ट्रिक बस को करीब एक से डेढ़ घंटे में चार्ज किया जा सकेगा।पूर्णिया में चार्जिंग स्टेशन का काम पूरा हो चुका है, जबकि पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और गया जी में काम चल रहा है। इसके अलावा पटना के फुलवारीशरीफ, राजगीर और मुजफ्फरपुर के बस डिपो में चार्जिंग स्टेशन पहले से ही काम कर रहे हैं।इस व्यवस्था से इलेक्ट्रिक बसों को नियमित परिचालन में मदद मिलने और चार्जिंग के लिए लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है।
पटना के 10 सरकारी परिसरों में लगेंगे फास्ट चार्जर
निजी इलेक्ट्रिक वाहन चालकों को राहत देने के लिए पटना के 10 प्रमुख सरकारी परिसरों में फास्ट डीसी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। इसके लिए परिवहन विभाग और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के बीच समझौता हुआ है।इन प्रस्तावित स्थलों में मुख्य सचिवालय, बिहार विधानसभा, समाहरणालय, विश्वेश्वरैया भवन, विकास भवन, सिंचाई भवन, मल्टी मॉडल हब कंकड़बाग, बेउर मोड़ और हार्डिंग रोड शामिल हैं।इन स्टेशनों पर इलेक्ट्रिक कारों को लगभग 45 से 60 मिनट में चार्ज करने की सुविधा देने की योजना है। साथ ही दोपहिया और तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग की व्यवस्था भी होगी।खास बात यह है कि सरकारी परिसरों में स्थापित होने के बावजूद इन चार्जिंग स्टेशनों का इस्तेमाल आम नागरिक भी कर सकेंगे। इससे निजी इलेक्ट्रिक वाहन चालकों को चार्जिंग के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे।
EV चार्जिंग स्टेशन लगाने पर 10 लाख रुपये तक अनुदान
बिहार ईवी नीति 2026 के तहत सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने वालों को मशीनरी और उपकरणों की लागत का 25 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये है। इससे निजी निवेशकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को चार्जिंग नेटवर्क विकसित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।चार्जिंग स्टेशन सरकारी भवनों, व्यावसायिक परिसरों, होटल, अस्पताल, शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स, पेट्रोल पंप, बस स्टैंड और पार्किंग स्थलों पर स्थापित किए जा सकते हैं। इसके अलावा हाईवे पर स्थित ढाबों एवं रेस्टोरेंट और पांच से अधिक परिवारों वाले आवासीय अपार्टमेंट तथा हाउसिंग सोसाइटी में भी इन्हें लगाने की व्यवस्था है।
इलेक्ट्रिक वाहन चालकों को मिलेगी राहत, निवेश के भी खुलेंगे रास्ते
चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार होने से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों की एक बड़ी चिंता—रास्ते में चार्जिंग की सुविधा मिलने—को कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, चार्जिंग स्टेशन लगाने पर मिलने वाला अनुदान कारोबारियों और संस्थानों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है।हालांकि, इस योजना की वास्तविक सफलता चार्जिंग स्टेशनों के समय पर चालू होने, उनकी उपलब्धता, चार्जिंग शुल्क और रखरखाव पर निर्भर करेगी। फिलहाल बिहार में ईवी चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार इलेक्ट्रिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।