बिहार में बिजली का 'झटका': दरों में बढ़ोतरी की तैयारी, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं पर बढ़ सकता है बोझ

बिहार की बिजली कंपनियों ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए टैरिफ में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। वितरण नेटवर्क सुधार के लिए ₹67 हजार करोड़ की मांग की गई है, जिससे घरेलू और कृषि बिजली महंगी होने के आसार हैं।

बिहार में बिजली का 'झटका': दरों में बढ़ोतरी की तैयारी, घरेलू

Patna -  बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। राज्य की बिजली वितरण कंपनियों ने वर्ष 2026-27 के लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष नया टैरिफ प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव में घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक श्रेणियों के लिए बिजली दरों में संशोधन की मांग की गई है। कंपनियों ने बिजली उत्पादन की बढ़ती लागत, लाइन लॉस और बुनियादी ढांचे के रखरखाव को इस बढ़ोतरी का मुख्य आधार बताया है। 

₹67 हजार करोड़ के फंड की आवश्यकता

बिजली कंपनियों ने अपने नेटवर्क को आधुनिक बनाने और घाटे को कम करने के लिए करीब ₹67 हजार करोड़ की वित्तीय आवश्यकता जताई है। इस राशि का बड़ा हिस्सा ट्रांसमिशन नेटवर्क और वितरण प्रणाली को सुधारने में खर्च किया जाएगा। विशेष रूप से राज्य के 16 चुनिंदा जिलों पर फोकस किया गया है, जहां बिजली आपूर्ति को और अधिक मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त निवेश का खाका तैयार किया गया है। 

घरेलू और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा सीधा असर

यदि नियामक आयोग इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे देता है, तो घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बिल में उल्लेखनीय इजाफा होना तय है। इसका सबसे अधिक प्रभाव मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ेगा, जो पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे हैं। जानकारों का मानना है कि फिक्स्ड चार्ज और प्रति यूनिट दर दोनों में बदलाव की संभावना है, जिससे आम आदमी का घरेलू बजट बिगड़ सकता है। 

खेती और व्यापार भी होंगे प्रभावित

बिजली की दरों में यह वृद्धि केवल घरों तक सीमित नहीं रहेगी। कृषि क्षेत्र और छोटे उद्योगों पर भी इसका व्यापक असर पड़ेगा। सिंचाई के लिए महंगी बिजली मिलने से किसानों की लागत बढ़ेगी, वहीं उद्योगों में उत्पादन खर्च बढ़ने से अंततः बाजार में वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। कई किसान संगठनों और व्यापारिक समूहों ने इस संभावित बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए विरोध के संकेत दिए हैं। 

जनसुनवाई के बाद होगा अंतिम निर्णय

फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है। राज्य विद्युत नियामक आयोग अब इस पर विधिवत सार्वजनिक सुनवाई (Public Hearing) आयोजित करेगा। इसमें उपभोक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और विशेषज्ञ अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करा सकेंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि कंपनियों की जरूरतों और आम जनता के हितों के बीच संतुलन बनाकर ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। अब सभी की निगाहें आयोग के आगामी आदेश पर टिकी हैं।