बिहार पुलिस के मुखिया की सादगी: DGP ने सुरक्षा काफिले का किया त्याग,फ्यूल बचाने के लिए खुद पेश की मिसाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा संरक्षण के आह्वान से प्रेरित होकर बिहार के डीजीपी ने एक बड़ी पहल की है। डीजीपी ने अपनी सुरक्षा के लिए मिलने वाले वाहनों के बड़े काफिले को छोड़कर 'ईंधन की बचत' मुहिम शुरू की है।

Bihar DGP Fuel Saving Campaign
DGP ने सुरक्षा काफिले का किया त्याग- फोटो : Reporter

पटना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के आह्वान को देखते हुए बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP)  विनय कुमार ने एक बेहद सराहनीय और अनुकरणीय पहल शुरू की है। राज्य के पुलिस मुखिया ने अपनी सुरक्षा के लिए मिलने वाले वाहनों के बड़े काफिले और तामझाम का त्याग करते हुए 'ईंधन की बचत' मुहिम की शुरुआत की है। डीजीपी के इस फैसले की प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच जमकर सराहना हो रही है।


साधारण तरीके से सफर की शुरुआत 

आमतौर पर डीजीपी की सुरक्षा और उनके काफिले में कई गाड़ियां, पुलिस बल और सायरन बजाती पायलट गाड़ियां चलती हैं, जिससे रोजाना भारी मात्रा में ईंधन की खपत होती है। प्रधानमंत्री के संदेश से प्रेरित होकर डीजीपी ने अब अनावश्यक सुरक्षा वाहनों को अपने काफिले से हटा दिया है। वे अब सीमित वाहनों और कम से कम सुरक्षा के साथ बेहद साधारण तरीके से सरकारी दौरों और कार्यालय के लिए सफर कर रहे हैं, ताकि ईंधन की बर्बादी को रोका जा सके।


महकमे के अन्य अधिकारियों के लिए संदेश 

डीजीपी की इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य पुलिस महकमे के भीतर ईंधन के दुरुपयोग को रोकना और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना है। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि जब महकमे के सर्वोच्च अधिकारी खुद इस तरह की सादगी अपनाएंगे, तो जिलों के पुलिस कप्तान (SP), डीएसपी और थाना प्रभारियों के बीच भी गाड़ियों के अनावश्यक इस्तेमाल पर रोक लगाने का एक कड़ा और सकारात्मक संदेश जाएगा।


पूरे राज्य में लागू हो सकती है व्यवस्था 

सूत्रों के अनुसार, डीजीपी की इस व्यक्तिगत पहल के बाद अब पुलिस मुख्यालय पूरे बिहार में सरकारी वाहनों के लिए एक नया 'फ्यूल ऑप्टिमाइजेशन' (ईंधन प्रबंधन) गाइडलाइन तैयार करने पर विचार कर रहा है। इसके तहत पुलिस गश्त और अति-आवश्यक ड्यूटी को छोड़कर, प्रशासनिक कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों के ईंधन बजट की समीक्षा की जाएगी। डीजीपी की इस अनोखी पहल को बिहार पुलिस को पर्यावरण-हितैषी (Eco-friendly) बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।