Vahan-Sarathi पोर्टल में बड़े खेल का भंडाफोड़: बिहार के लिपिकों ने खोली पोल, बोले- बिना ID के हो रही करोड़ों की लूट
Bihar News : राज्य के विभिन्न जिला परिवहन कार्यालयों (DTO) में कार्यरत लिपिकों (क्लर्कों) ने सामूहिक रूप से राज्य परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर एक बहुत बड़े तकनीकी और वित्तीय खेल का पर्दाफाश किया है.....
Patna : बिहार परिवहन विभाग के “डिजिटल इंडिया” और पारदर्शी गवर्नेंस के दावों को खुद विभाग के ही कर्मचारियों ने कटघरे में खड़ा कर दिया है। राज्य के विभिन्न जिला परिवहन कार्यालयों (DTO) में कार्यरत लिपिकों (क्लर्कों) ने सामूहिक रूप से राज्य परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर एक बहुत बड़े तकनीकी और वित्तीय खेल का पर्दाफाश किया है। लिपिकों का आरोप है कि 'वाहन' (Vahan) और 'सारथी' (Sarathi) पोर्टल पर आउटसोर्सिंग के जरिए रखे गए कंप्यूटर ऑपरेटरों की मनमानी के कारण सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है और बैकडोर से अनधिकृत बदलाव धड़ल्ले से किए जा रहे हैं।
कोशी प्रमंडल सहित कई जिलों के क्लर्कों ने खोला मोर्चा, बताई अपनी बेबसी
इस मामले को लेकर सहरसा, मधेपुरा, अररिया, सुपौल समेत कोशी प्रमंडल और अन्य जिलों के निम्नवर्गीय लिपिकों ने 13 से 21 मई 2026 के बीच विभाग को सिलसिलेवार पत्र भेजे हैं। इन पत्रों में लिपिकों ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए बताया कि उनके पास Vahan-Sarathi पोर्टल का अपना आधिकारिक यूजर आईडी (User ID) और पासवर्ड ही नहीं है। लॉग-इन क्रेडेंशियल न होने के कारण आउटसोर्स कंप्यूटर ऑपरेटर सिस्टम में क्या एंट्री कर रहे हैं और किसे बैकडेट या अनधिकृत लाभ पहुंचा रहे हैं, इसकी रियल टाइम (Real Time) मॉनिटरिंग या समीक्षा करना उनके लिए कतई संभव नहीं है।
बिना वेरिफिकेशन के जारी हो रहे ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन, राजस्व को भारी चपत
लिपिकों ने अपने पत्र में खुलासा किया है कि दरभंगा, बेतिया और रोहतास जैसे बड़े जिलों में पूर्व में भी इस तकनीकी खामी का फायदा उठाकर अवैध चालक अनुज्ञप्ति (ड्राइविंग लाइसेंस) और वाहन निबंधन (रजिस्ट्रेशन) करने के सुनियोजित मामले सामने आ चुके हैं, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। बिना किसी विभागीय अधिकारी या लिपिक के भौतिक और डिजिटल वेरिफिकेशन के, आउटसोर्स कर्मी मनमाने ढंग से पोर्टल का दुरुपयोग कर रहे हैं। इससे पूरे परिवहन विभाग की सुरक्षा प्रोटोकॉल ध्वस्त हो चुकी है और गड़बड़ी पकड़े जाने पर गाज सीधे स्थाई लिपिकों पर ही गिरती है।
"जब वित्त विभाग का CFMS 2.0 चल सकता है, तो परिवहन का पोर्टल क्यों नहीं?"
अपनी मांगों के समर्थन में लिपिकों ने बिहार सरकार के ही वित्त विभाग द्वारा संचालित 'CFMS 2.0' पोर्टल का जीवंत उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के पोर्टल पर लिपिक 'मेकर और चेकर' (Maker-Checker) की भूमिका निभाते हैं, जिससे हर स्तर पर डिजिटल ऑडिट होता है और वित्तीय अनुशासन के साथ जवाबदेही तय रहती है। लिपिकों ने मांग की है कि ठीक इसी प्रकार का सुरक्षित मॉडल Vahan और Sarathi पोर्टल पर भी तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
पारदर्शिता पर उठे सवाल, क्लर्कों ने की तुरंत यूजर आईडी-पासवर्ड देने की मांग
लिपिक संघ ने दोटूक शब्दों में चेताया है कि सत्यापन प्रक्रिया (Verification Process) के अभाव में न केवल विभाग की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि सरकारी खजाने को ऐसी अपूरणीय क्षति पहुंच रही है जिसकी भरपाई नामुमकिन है। उन्होंने राज्य परिवहन आयुक्त से पुरजोर मांग की है कि सभी क्षेत्रीय और जिला कार्यालयों के लिपिकों को उनके कार्यक्षेत्र के अनुसार पोर्टल का यूजर आईडी और पासवर्ड तुरंत निर्गत किया जाए। अब गेंद सीधे परिवहन विभाग और सरकार के पाले में है कि वह इस 'डिजिटल सुविधा' को 'डिजिटल घोटाले' का अड्डा बनने से कैसे रोकती है।
धीरज परासर की रिपोर्ट