बड़ी खबर : अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के असिस्टेंट रजिस्ट्रार घूस लेते गिरफ्तार, निगरानी की टीम ने रंगे हाथ दबोचा
Patna : बिहार की राजधानी पटना से एक बड़ी खबर सामने आई है। जहां निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय में बड़ी कार्रवाई करते हुए असिस्टेंट रजिस्ट्रार सनाउल्लाह को धूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। निगरानी की टीम ने यह कार्रवाई विश्वविद्यालय परिसर में जाल बिछाकर की, जहां आरोपी को 2.5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए दबोचा गया। इस गिरफ्तारी के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है।
निगरानी विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई समस्तीपुर के एक कॉलेज कर्मचारी रामानंद महतो द्वारा दर्ज कराई गई लिखित शिकायत के आधार पर की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि कॉलेज के केआरसी (KRC) की मान्यता या संबंधित कार्यों के बदले कुल 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। आर्थिक असमर्थता जताते हुए शिकायतकर्ता पहली किस्त के रूप में 2 लाख 50 हजार रुपये लेकर पहुँचा था, तभी पहले से मुस्तैद निगरानी टीम ने आरोपी को धर दबोचा।
गिरफ्तारी के बाद असिस्टेंट रजिस्ट्रार सनाउल्लाह ने जो खुलासे किए, उसने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। आरोपी ने दावा किया कि वह केवल एक बिचौलिए (मिडिएटर) के तौर पर काम कर रहा था और यह रिश्वत विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर आलमगीर के निर्देश पर मांगी जा रही थी। सनाउल्लाह के मुताबिक, इस डील में उसका कुछ प्रतिशत कमीशन तय था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास इस पूरी बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड मौजूद है, जो उनके आरोपों की पुष्टि कर सकता है।
निगरानी विभाग की टीम डीएसपी श्याम बाबू प्रसाद के नेतृत्व में मामले की तह तक जाने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद टीम ने आरोपी के कार्यालय, निजी आवास और अन्य संभावित ठिकानों पर दबिश दी। इस दौरान भारी मात्रा में नकदी, संदिग्ध दस्तावेज और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। विभाग अब इन दस्तावेजों और जब्त किए गए मोबाइल-लैपटॉप की गहन जांच कर रहा है ताकि भ्रष्टाचार के इस सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जा सके।
फिलहाल, निगरानी विभाग वाइस चांसलर पर लगे गंभीर आरोपों की सत्यता की जांच कर रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य सबूतों को खंगाला जा रहा है और यदि वीसी की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं, तो उन पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में विश्वविद्यालय के कुछ अन्य कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है, जिनसे जल्द ही पूछताछ की जा सकती है।
अनिल की रिपोर्ट