बांकीपुर उपचुनाव: बीजेपी प्रत्याशी अभिषेक सिन्हा ने वापस लिया नामांकन, राजनीतिक गलियारे में भारी हलचल

बांकीपुर उपचुनाव: बीजेपी प्रत्याशी अभिषेक सिन्हा ने वापस लिय
बीजेपी प्रत्याशी अभिषेक ने वापस लिया नामांकन- फोटो : नरोत्तम कुमार

Patna : बिहार की सियासत से एक बड़ी खबर सामने आई है। बांकीपुर विधान सभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव में एक बड़ा उलट-फेर हुआ है। नामांकन करने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ 'अभिषेक बंटी' ने चुनावी मैदान से पीछे हटते हुए अपना नामांकन वापस ले लिया है। इस अचानक आए फैसले के बाद से न सिर्फ पार्टी के भीतर बल्कि पूरे इलाके के राजनीतिक गलियारे में भारी हलचल मच गई है और सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।


पारिवारिक कारणों का दिया हवाला

नामांकन वापसी की इस अप्रत्याशित प्रक्रिया के तुरंत बाद अभिषेक कुमार सिन्हा ने मीडिया के सामने आकर अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे कुछ बेहद निजी और अपरिहार्य पारिवारिक कारणों की वजह से इस बार का उपचुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने अपनी असमर्थता जताते हुए कहा कि पारिवारिक परिस्थितियों को प्राथमिकता देना इस समय उनके लिए बेहद जरूरी था।


समर्थकों और कार्यकर्ताओं में मायूसी

अभिषेक बंटी द्वारा नामांकन वापस लिए जाने की खबर जैसे ही आम हुई, उनके समर्थकों और बीजेपी के स्थानीय कार्यकर्ताओं में मायूसी छा गई। चुनाव प्रचार में पूरी ताकत से जुटे कार्यकर्ताओं के लिए यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है। हालांकि, अभिषेक कुमार सिन्हा ने अपने बयान में पार्टी और शीर्ष नेतृत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।


पार्टी के लिए पैदा हुई नई चुनौती

एन वक्त पर बीजेपी प्रत्याशी के रेस से बाहर हो जाने के बाद अब चुनावी मैदान में पार्टी के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। इस वीआईपी सीट या महत्वपूर्ण उपचुनाव में अब बीजेपी की अगली रणनीति क्या होगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। संगठन के वरिष्ठ नेता इस आपात स्थिति से निपटने और अगले कदम को लेकर लगातार मंथन कर रहे हैं।


विपक्षी खेमे में बढ़ी हलचल

बीजेपी उम्मीदवार के मैदान छोड़ने के बाद विपक्षी दलों और अन्य निर्दलीय प्रत्याशियों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। इस नए राजनीतिक घटनाक्रम ने विपक्षी खेमे को सीधे तौर पर बढ़त दे दी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी इस सीट पर किसी अन्य विकल्प को समर्थन देती है या फिर इस सियासी शून्यता को भरने के लिए कोई नया रास्ता अख्तियार करती है।


नरोत्तम की रिपोर्ट