संघर्ष, संकल्प और मातृत्व की अनूठी मिसाल: 70वीं बीपीएससी में चयनित हुईं दो बच्चों की मां स्वीटी राज

सपनों की कोई उम्र नहीं होती और न ही कोई बाधा स्थाई होती है। यदि संकल्प अडिग हो, तो परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, सफलता कदम चूमती ही है। 70वीं बीपीएससी में चयनित होकर इसे सच कर दिखाया है पटना की बेटी स्वीटी राज ने....

संघर्ष, संकल्प और मातृत्व की अनूठी मिसाल: 70वीं बीपीएससी में
70वीं बीपीएससी में चयनित हुईं दो बच्चों की मां स्वीटी राज- फोटो : न्यूज4नेशन

Patna : समाज में अक्सर यह माना जाता है कि विवाह और बच्चों की ज़िम्मेदारियों के बाद महिलाओं के करियर और सपनों के रास्ते सीमित हो जाते हैं, लेकिन पटना के लोहानीपुर की रहने वाली स्वीटी राज ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। बिहार लोक सेवा आयोग (70वीं बीपीएससी) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर स्वीटी राज का चयन बिहार राजस्व सेवा के अधिकारी के रूप में हुआ है। एक समय पारिवारिक संकट और पिता के साथ हुई दुखद घटना के कारण परिवार की सबसे बड़ी संतान होने के नाते उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।


मामा पूर्व आईपीएस सुधाकर किशोर के मार्गदर्शन और बैंक की नौकरी के साथ जारी रखा संघर्ष

कठिन दौर में स्वीटी राज को उनके मामा और सेवानिवृत्त आईपीएस (IPS) अधिकारी सुधाकर किशोर का मानसिक संबल और मार्गदर्शन मिला। विपरीत परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाकर उन्होंने पहले रोजगार हासिल किया और वर्तमान में वे कैनरा बैंक में एक अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। बैंकिंग क्षेत्र की बेहद व्यस्त और जिम्मेदारी भरी नौकरी के साथ-साथ दो बच्चों की परवरिश, ससुराल और मायके के दायित्वों को संभालते हुए उन्होंने प्रशासनिक सेवा की तैयारी जारी रखी। उन्होंने सिद्ध कर दिया कि एक मां इस धरती की सर्वश्रेष्ठ प्रबंधक (Manager) होती है, जो हर मोर्चे पर संतुलन साध सकती है।


कई बार पीटी (PT) में मिली असफलता, पर कमियों को सुधारकर रच दिया इतिहास

स्वीटी राज की यह सफलता इतनी आसान नहीं थी, इसके पीछे वर्षों का त्याग और धैर्य छुपा है। बीपीएससी की तैयारी के दौरान उन्हें लगातार कई बार असफलता का स्वाद चखना पड़ा। स्थिति यह थी कि कई प्रयासों में वे प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) भी पास नहीं कर सकीं। आम तौर पर लोग ऐसी परिस्थितियों में थककर अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं, लेकिन स्वीटी ने हर असफलता को एक नई सीख के रूप में लिया। उन्होंने अपनी कमियों का बारीकी से विश्लेषण किया और अंततः अपने अटूट परिश्रम के बल पर अधिकारी बनकर ही दम लिया।


कैनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन और सहयोगियों के प्रति जताया आभार

अपनी इस गौरवमयी कामयाबी पर स्वीटी राज ने कैनरा बैंक के अपने सहकर्मियों और विशेष रूप से कैनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (CBOA) के साथियों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यस्थल से उन्हें न केवल व्यावसायिक अनुभव मिला, बल्कि साथियों से निरंतर प्रेरणा और सहयोग भी प्राप्त हुआ, जिसने उन्हें हर कठिन समय में आगे बढ़ने की ऊर्जा दी। यह मानवीय मूल्य और सहकर्मियों का साथ उनकी इस लंबी और संघर्षपूर्ण यात्रा का एक बेहद महत्वपूर्ण आधार स्तंभ रहा है।


हजारों कामकाजी माताओं और युवाओं के लिए प्रेरणा बनीं लोहानीपुर की बेटी

दो बच्चों की मां होने के साथ-साथ पेशेवर और पारिवारिक जीवन में अद्भुत तालमेल बिठाकर सफलता का शिखर छूने वाली स्वीटी राज की कहानी आज पूरे बिहार के युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी है। उनकी यह उपलब्धि समाज को यह संदेश देती है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती और न ही कोई बाधा स्थाई होती है। यदि संकल्प अडिग हो, तो परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, सफलता कदम चूमती ही है। स्वीटी राज की इस सफलता पर पूरे क्षेत्र के लोग गौरवान्वित हैं और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं मिल रही हैं।