धर्मशीला देवी अस्पताल नवादा को पटना हाईकोर्ट से मिली बड़ी जीत, सील खोलने और लाइसेंस बहाल करने का आदेश
पूर्व मंत्री राजबल्लभ यादव के बेटे की मौत के बाद उपजे विवाद के बाद धर्मशीला देवी अस्पताल नवादा को सील किया गया था। अब अस्पताल प्रबंधन को पटना हाई कोर्ट से बड़ी जीत मिली है।
Bihar News : नवादा के केन्दुआ स्थित धर्मशीला देवी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल फाउंडेशन को पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अस्पताल को बंद करने और उसका निबंधन रद्द करने के नवादा प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के आदेश को हाईकोर्ट के निर्देश के बाद निरस्त कर दिया गया है। अस्पताल को 3 अक्टूबर 2026 यानी शनिवार को सीलमुक्त कर संचालक को सौंपने का आदेश दिया गया है। साथ ही अस्पताल का निबंधन भी पुनर्स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। पूर्व मंत्री राजबल्लभ यादव के बेटे की मौत के बाद उपजे विवाद के बाद इस अस्पताल को सील किया गया था। अब अस्पताल प्रबंधन को पटना हाई कोर्ट से बड़ी जीत मिली है।
हाईकोर्ट ने 1 अक्टूबर को मामले की सुनवाई के दौरान अस्पताल प्रबंधन को उसी दिन जिलाधिकारी, नवादा के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन देने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यदि अस्पताल को बंद करने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन पाया जाता है, तो अस्पताल का संचालन बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
4 सितंबर को सील किया गया अस्पताल
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अस्पताल निदेशक विकास कुमार ने 1 अक्टूबर को नवादा डीएम के समक्ष अभ्यावेदन दिया। अभिलेखों और न्यायालय के आदेश की समीक्षा के बाद संबंधित प्राधिकारी ने 3 सितंबर 2026 के उन आदेशों को निरस्त कर दिया, जिनके तहत अस्पताल का निबंधन रद्द किया गया था। इसके बाद सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, नवादा को अस्पताल का निबंधन बहाल करने और 3 अक्टूबर को अस्पताल परिसर को सीलमुक्त कर संचालक को हस्तगत कराने का निर्देश दिया गया है। सीलमुक्ति के दौरान दंडाधिकारी और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति के लिए एसडीओ नवादा सदर और एसडीपीओ सदर-2 को भी निर्देशित किया गया है।
क्या था पूरा मामला?
धर्मशीला देवी अस्पताल पर कार्रवाई का मामला पूर्व मंत्री राजबल्लभ प्रसाद यादव और नवादा विधायक विभा देवी के छोटे बेटे अखिलेश कुमार की मौत से जुड़ा था। 19 मार्च 2026 को सड़क हादसे में घायल होने के बाद अखिलेश को धर्मशीला देवी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप था कि करीब सात घंटे इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से रेफर किया गया। बाद में पटना के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
अखिलेश की मौत के बाद राजबल्लभ यादव ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत पर 1 अप्रैल को नवादा मुफस्सिल थाना में कांड संख्या 119/26 दर्ज किया गया। इसमें BNS की धारा 106(01) के तहत अस्पताल मालिक, प्रबंधक और चिकित्सकों पर कथित लापरवाही के आरोप लगाए गए।
उच्चस्तरीय टीम ने की थी जांच
डीएम के निर्देश पर सदर अस्पताल के चिकित्सकों की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया। इसके बाद सिविल सर्जन की अनुशंसा पर स्वास्थ्य विभाग को विस्तृत जांच के लिए लिखा गया। 3 जून 2026 को स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय टीम ने नवादा पहुंचकर मामले की जांच की थी। जांच समिति की रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों को जिम्मेदार ठहराए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का निबंधन रद्द कर दिया था। इसके बाद 4 सितंबर 2026 को प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल को सील कर दिया गया था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद अस्पताल का निबंधन बहाल करते हुए उसे 3 अक्टूबर को सीलमुक्त करने का आदेश दिया गया है।