कौआकोल पीएचसी के जर्जर छत एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिरा, ड्यूटी पर तैनात एएनएम घायल

Bihar News : नवादा जिले के कौआकोल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन की स्थिति वर्तमान में बेहद जर्जर और बदहाल है। आज इस भवन के इमरजेंसी वार्ड में छत का एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिर गया। इस घटना में वार्ड में कार्यरत एएनएम घायल हो गईं....

कौआकोल पीएचसी के जर्जर छत एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिरा, ड्यूटी

Nawada : जिले के कौआकोल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में मंगलवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। अस्पताल भवन की जर्जर छत का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया। इस घटना की चपेट में आने से वहां इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी कर रही एएनएम सुनीता कुमारी घायल हो गईं। घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।


इमरजेंसी ड्यूटी के दौरान हुआ हादसा, बाल-बाल बचीं एएनएम

मिली जानकारी के अनुसार, घटना के वक्त एएनएम सुनीता कुमारी इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की सेवा और अपनी रूटीन ड्यूटी पर तैनात थीं। इसी बीच बिना किसी आहट के छत का एक भारी कंक्रीट का टुकड़ा सीधे उनके ऊपर आ गिरा। छत का मलबा गिरने से उन्हें शरीर के कई हिस्सों में चोटें आईं, हालांकि गनीमत यह रही कि वे किसी बड़ी और गंभीर अनहोनी का शिकार होने से बाल-बाल बच गईं। घायल एएनएम का प्राथमिक उपचार तुरंत उसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया।


अस्पताल भवन की बदहाली: रोज गिरता है प्लास्टर

कौआकोल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के इस सरकारी भवन की स्थिति वर्तमान में बेहद जर्जर और बदहाल बताई जा रही है। स्थानीय लोगों और वहां कार्यरत कर्मियों के मुताबिक, इस अस्पताल की छतों से आए दिन प्लास्टर और कंक्रीट के छोटे-छोटे टुकड़े टूटकर गिरते रहते हैं। इस जर्जर व्यवस्था के कारण अस्पताल में चौबीसों घंटे अपनी सेवा देने वाले डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और दूर-दराज से इलाज कराने आने वाले लाचार मरीजों की सुरक्षा पर हमेशा मौत का साया मंडराता रहता है।


जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता से आक्रोश

इस दर्दनाक हादसे के बाद स्वास्थ्यकर्मियों, विभिन्न संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने एकजुट होकर अस्पताल भवन की अविलंब मरम्मत कराने या नए भवन के निर्माण की पुरजोर मांग की है। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को इस बदहाली की लिखित और मौखिक जानकारी पहले से है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस या सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया है।


स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल

ग्रामीणों और स्वास्थ्य संघों ने कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासन नींद से नहीं जागा और जर्जर भवन को दुरुस्त नहीं किया गया, तो भविष्य में किसी निर्दोष की जान जा सकती है। यह पूरी घटना सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था और बुनियादी ढांचे की हकीकत पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करती है, जहां दूसरों का इलाज करने वाले और जीवन देने वाले कोरोना वॉरियर्स व स्वास्थ्यकर्मी खुद सरकारी उदासीनता के कारण सुरक्षित नहीं हैं।


अमन सिन्हा की रिपोर्ट