Bihar News: बुद्ध के शांति संदेश से गूंजा राजगीर, विश्व शांति स्तूप का 57वां स्थापना दिवस मना
Bihar News: भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और अहिंसा के संदेश की गूंज सुनाई दी। ...
Bihar News: राजगीर की रत्नागिरि पहाड़ी पर रविवार को भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और अहिंसा के संदेश की गूंज सुनाई दी। मौका था विश्व प्रसिद्ध विश्व शांति स्तूप के 57वें स्थापना दिवस समारोह का, जहां धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक श्रद्धा और अंतरराष्ट्रीय मैत्री का अनूठा संगम देखने को मिला। समारोह में बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री केदारनाथ गुप्ता मुख्य अतिथि और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। जापान समेत कई देशों से आए बौद्ध प्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर विश्व शांति, सद्भाव और भाईचारे की कामना की।
धार्मिक अनुष्ठानों के बीच दिया शांति और सद्भाव का संदेश
स्थापना दिवस समारोह का आयोजन राजगीर बुद्ध विहार सोसाइटी और निप्पोनजान म्योहोजी की ओर से किया गया। कार्यक्रम में जापान की संतोकू कंपनी के सीईओ केंसुके होरिउची सम्मानित अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। इस दौरान बौद्ध परंपराओं के मुताबिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। निप्पोनजान म्योहोजी के वरिष्ठ बौद्ध भिक्षुओं के साथ थेरवाद परंपरा के भिक्षुओं ने भी पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया।
समारोह में भगवान बुद्ध के उपदेशों को याद करते हुए लोगों से उनके बताए रास्ते पर चलने की अपील की गई। वक्ताओं और बौद्ध प्रतिनिधियों ने शांति, करुणा, सहिष्णुता और अहिंसा को मौजूदा दौर की अहम जरूरत बताया। धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए यह संदेश दिया गया कि आपसी प्रेम, संवाद और भाईचारे से ही दुनिया में स्थायी शांति कायम की जा सकती है।
भारत-जापान के आध्यात्मिक रिश्तों का प्रतीक है स्तूप
राजगीर की रत्नागिरि पहाड़ी पर स्थित विश्व शांति स्तूप देश-दुनिया के बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। सफेद संगमरमर से निर्मित यह भव्य स्तूप शांति और अहिंसा के साथ भारत और जापान के गहरे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का भी प्रतीक है। स्तूप में भगवान बुद्ध की चार स्वर्णिम प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो उनके जीवन के विभिन्न चरणों को दर्शाती हैं।
पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस ऐतिहासिक स्थल से राजगीर की प्राकृतिक छटा का मनमोहक नजारा दिखाई देता है। हर साल बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक, बौद्ध भिक्षु और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। लोगों के लिए यह स्थल केवल पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शांति और आत्मचिंतन का भी महत्वपूर्ण ठिकाना है।
25 अक्टूबर 1969 को हुआ था उद्घाटन
विश्व शांति स्तूप के निर्माण की प्रेरणा जापानी बौद्ध भिक्षु निचिदात्सु फुजी गुरुजी से जुड़ी है। तत्कालीन राष्ट्रपति वी.वी. गिरि ने 25 अक्टूबर 1969 को इस स्तूप का उद्घाटन किया था। इसके बाद से हर साल 25 अक्टूबर को स्थापना दिवस मनाया जाता है।
इस वर्ष 57वें स्थापना दिवस समारोह में विभिन्न देशों के बौद्ध प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने राजगीर की अंतरराष्ट्रीय पहचान को एक बार फिर मजबूती दी। आयोजन ने भगवान बुद्ध के शाश्वत संदेश को दोहराते हुए दुनिया को अमन, मोहब्बत और इंसानियत के रास्ते पर चलने की प्रेरणा दी। समारोह के जरिए यह संदेश भी सामने आया कि धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध देशों के बीच दोस्ती, सहयोग और आपसी सद्भाव को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
रिपोर्ट-राज पाण्डेय