कोलकाता हादसे का शिकार हुए मुंगेर के 3 मजदूरों के शव गांव पहुंचते ही मची चीख-पुकार, परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे मृतक

कोलकाता के तारातला इलाके में एक निर्माणाधीन गोदाम की छत ढहने से मरे मुंगेर जिले के तीनों प्रवासी मजदूरों के शव शुक्रवार को जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचे, पूरे इलाके में कोहराम मच गया। परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो उठा....

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कोलकाता हादसे का शिकार हुए मुंगेर के 3 मजदूरों के शव पहुंचा गांव- फोटो : इम्तियाज खान

Munger : कोलकाता के तारातला इलाके में एक निर्माणाधीन गोदाम की छत ढहने से जान गंवाने वाले मुंगेर के तीनों मजदूरों के शव जैसे ही शुक्रवार को उनके पैतृक गांव पहुंचे, पूरे इलाके में कोहराम मच गया। मृतक मजदूरों की पहचान धरहरा प्रखंड के लगमा और मानगढ़ गांव निवासी शिरचन कुमार, प्रेम कुमार उर्फ धी कुमार और नवीन राम के रूप में हुई है। शवों के आते ही परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो उठा और बड़ी संख्या में ग्रामीण ढांढस बंधाने मृतकों के घर पहुंचे।


परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे मृतक

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, इस हादसे ने हंसते-खेलते परिवारों को पूरी तरह उजाड़ दिया है। मृतक शिरचन कुमार और प्रेम कुमार आपस में चचेरे भाई थे, जो अपने-अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए कोलकाता में रहकर मजदूरी करते थे। वहीं, नवीन राम भी अपने सिर पर परिवार की बड़ी जिम्मेदारी होने के कारण कोलकाता में हाड़-तोड़ मेहनत कर रहे थे। तीनों की मौत से परिजनों के सामने अब आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।


गमगीन माहौल में गंगा घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

शवों के गांव पहुंचने के बाद ग्रामीणों और रिश्तेदारों के अंतिम दर्शन के लिए उन्हें कुछ देर गांव में ही रखा गया। इसके बाद एक साथ तीनों की अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें भारी संख्या में नम आंखों के साथ ग्रामीण शामिल हुए। स्थानीय गंगा घाट पर पूरे गमगीन माहौल और रीति-रिवाज के साथ तीनों मृतकों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।


पीड़ित परिवारों ने सरकार से की आर्थिक मदद की मांग

इस दर्दनाक हादसे के बाद से पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। अपनों को खो चुके माता-पिटा और स्वजन गहरे सदमे में हैं। ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों ने बिहार व पश्चिम बंगाल सरकार तथा जिला प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। परिजनों ने अपील की है कि:

  • मृतकों के आश्रितों को जल्द से जल्द उचित आर्थिक सहायता (मुआवजा) दी जाए।
  • इस हादसे में घायल हुए अन्य स्थानीय मजदूरों के बेहतर और मुफ्त इलाज की व्यवस्था की जाए।


इम्तियाज की रिपोर्ट