मुंगेर मॉडल सदर अस्पताल की दोनों लिफ्टें खराब, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को वार्ड तक जाने में हो रही भारी परेशानी
मुंगेर सदर अस्पताल में लगे दो लिफ्ट पिछले दो दिनों से खराब पड़ा है। लिफ्त के खराब रहने से गर्भवती और गंभीर रुप से बीमार मरीजों को प्रथम तल बने आईसीयू और अन्य वार्डो में जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है....
Munger : जिले के मॉडल सदर अस्पताल में इलाज कराने आ रहे मरीजों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अस्पताल परिसर में लगी दोनों लिफ्टें पिछले दो दिनों से तकनीकी खराबी के कारण पूरी तरह ठप पड़ी हैं। इसके चलते अस्पताल आने वाले गंभीर मरीजों, नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और लाचार बुजुर्गों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लिफ्ट बंद होने के कारण सबसे संवेदनशील वार्डों तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया है।
ऊपरी मंजिल पर हैं आईसीयू और प्रसव वार्ड, स्वास्थ्यकर्मी भी परेशान
सदर अस्पताल की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि इसके सबसे महत्वपूर्ण विभाग, जैसे आईसीयू (ICU) और प्रसव वार्ड (लेबर रूम), अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर संचालित होते हैं। सामान्य दिनों में गंभीर मरीजों को लिफ्ट के सहारे बेहद आसानी और सुरक्षा के साथ इन वार्डों तक पहुंचा दिया जाता था। मगर, अब दोनों लिफ्टों के खराब हो जाने के कारण मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर के सहारे सीढ़ियों से ऊपर ले जाना पड़ रहा है। इस अव्यवस्था ने मरीजों के साथ-साथ तीमारदारों और ऑन-ड्यूटी स्वास्थ्यकर्मियों की मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं।
प्रसव पीड़ा में सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर गर्भवती महिलाएं
इस तकनीकी खराबी और प्रशासनिक उदासीनता का सबसे बड़ा असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। दूर-दराज के इलाकों से बेहद गंभीर स्थिति और प्रसव पीड़ा (Labor Pain) में अस्पताल पहुँचने वाली महिलाओं को सीढ़ियां चढ़कर ऊपरी मंजिल पर स्थित प्रसव वार्ड तक जाना पड़ रहा है।
परिजनों का फूटा गुस्सा, अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
अस्पताल में फैली इस अव्यवस्था को लेकर मरीजों और उनके परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों का आना-जाना होता है, वहां लिफ्ट जैसी अति-आवश्यक सुविधा का दो दिनों तक बंद रहना आपराधिक कृत्य है। लोगों का कहना है कि वीआईपी दावों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि मरीजों को रामभरोसे छोड़ दिया गया है।
प्रबंधन ने साधी चुप्पी
सदर अस्पताल परिसर में आक्रोशित लोगों और तीमारदारों ने अस्पताल प्रशासन से जल्द से जल्द दोनों लिफ्टों को ठीक कराने की पुरजोर मांग की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर समय रहते इस तकनीकी खराबी को दुरुस्त नहीं किया गया, तो सीढ़ियों से ले जाने के दौरान किसी भी समय किसी गंभीर मरीज की जान जोखिम में पड़ सकती है और कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इस पूरे मामले पर हैरानी की बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से लिफ्ट मरम्मत को लेकर अब तक कोई स्पष्ट जानकारी या समय-सीमा नहीं बताई गई है।
इम्तियाज की रिपोर्ट