Motihari Fertilizer Scam: कृषि विभाग और खाद माफिया की साठगांठ का खुलासा, SDO की जांच में फर्जी निकला गोदाम
मोतीहारी में कृषि विभाग और खाद माफिया की साठगांठ का बड़ा खुलासा हुआ हैलाइसेंस मिलने से एक दिन पहले ही लाखों की खाद बेचे जाने और तय स्थान से 5 किमी दूर अवैध गोदाम संचालित करने के मामले में SDO के निर्देश पर कारोबारी के खिलाफ FIR दर्ज की जा रही है।
मोतीहारी में खाद माफिया और कृषि विभाग की कथित गहरी साठगांठ का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिस खाद गोदाम को शुरुआत में सदर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी ने वैध और स्टॉक को सही ठहराया था, वह जांच के बाद पूरी तरह फर्जी और अनियमितताओं से भरा निकला। इस पूरे मामले का पर्दाफाश सदर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के सख्त रुख और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई गहन जांच के बाद हुआ है।
अधिकारियों के विरोधाभासी बयान से मचा हड़कंप
मामले की शुरुआत तब हुई जब मोतीहारी सदर SDO अरुण कुमार और DSP दिलीप कुमार को लक्ष्मण चौक स्थित एक गोदाम में कालाबाजारी के उद्देश्य से उर्वरक रखे होने की सूचना मिली। SDO के निर्देश पर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी सुरेश प्रसाद गोदाम पहुंचे और उन्होंने मीडिया में बयान दिया कि गोदाम पूरी तरह वैध है और स्टॉक भी सही है। हालांकि, मीडिया में सवाल उठने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई।
प्रशासनिक सख्ती के बाद खुला फर्जीवाड़े का राज
मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर SDO ने तुरंत एक्शन लिया और बंजरिया अंचलाधिकारी (CO) की उपस्थिति में अनुमंडल कृषि पदाधिकारी के माध्यम से पूरे मामले की वीडियोग्राफी कराते हुए कड़ाई से जांच के आदेश दिए। तीन दिनों तक चली इस मैराथन जांच में कृषि विभाग के दावों की पोल खुल गई और विभाग को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा।

लाइसेंस स्थल से 5 किलोमीटर दूर मिला अवैध गोदाम
जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि जिस गोदाम को कृषि अधिकारी पहले सही बता रहे थे, वह लाइसेंस में दर्ज पते पर था ही नहीं। कागजों में लाइसेंस का पता 'मानसपूरी आजाद नगर' दर्ज था, जबकि असल में गोदाम वहां से 5 किलोमीटर दूर बंजरिया के लक्ष्मण चौक पर संचालित हो रहा था। कंपनीवार स्टॉक और भौतिक सत्यापन के दौरान खाद के रखरखाव में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गईं।
लाइसेंस मिलने से एक दिन पहले ही लाखों की खाद की बिक्री
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि दुकान का लाइसेंस 10 सितंबर को जारी हुआ था, जबकि 09 सितंबर यानी लाइसेंस मिलने से एक दिन पहले ही 200 से अधिक बोरी यूरिया खाद बेच दी गई थी। दुकानदार द्वारा उर्वरक का स्टॉक और बिक्री रजिस्टर भी जांच टीम को उपलब्ध नहीं कराया गया। यह पूरा मामला मेसर्स मिथलेश कुमार सुनील कुमार (छौड़ादानो) नामक थोक खाद विक्रेता के गोदाम से जुड़ा है।
जांच की आंच के बीच प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई शुरू
इस खुलासे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब पिछले एक साल से इस दुकान का लाइसेंस समाप्त था, तब किस अधिकारी की मिलीभगत से दुकानदार को खाद का आवंटन होता रहा। वहीं दूसरी ओर, रक्सौल SDO के निर्देश पर छौड़ादानो BAO ने भी उक्त व्यवसाई के अन्य गोदाम की जांच कर हजारों बोरी उर्वरक की रिपोर्ट सौंप दी है। फिलहाल, सदर SDO के कड़े निर्देश के बाद अनुमंडल कृषि पदाधिकारी आरोपी खाद कारोबारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गए हैं।
मोतिहारी से हिमांशु की रिपोर्ट