Bihar Salary Fraud: ना हाजिरी, ना ड्यूटी,फिर भी वेतन जारी,हाकिम की मेहरबानी से सरकारी खजाने पर डाका, सिस्टम की पोल खुलने से हड़कंप

Bihar Salary Fraud: बीसीओ कार्यालय में तैनात डाटा ऑपरेटर सगीर आलम को लेकर जो खुलासा हुआ है, उसने पूरे महकमे को हिला कर रख दिया है।...

Motihari data operator drew salary without attendance for 9
हाजिरी के बिना हाजिर- फोटो : reporter

Bihar Salary Fraud:बीसीओ कार्यालय में तैनात डाटा ऑपरेटर सगीर आलम को लेकर जो खुलासा हुआ है, उसने पूरे महकमे को हिला कर रख दिया है। बिहार के मोतीहारी जिले से प्रशासनिक लापरवाही और कथित मिलीभगत का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सरकारी सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अरेराज प्रखंड स्थित बीसीओ कार्यालय में तैनात डाटा ऑपरेटर सगीर आलम को लेकर जो खुलासा हुआ है, उसने पूरे महकमे को हिला कर रख दिया है। जानकारी के मुताबिक, 7 जुलाई 2025 को सगीर आलम की डाटा ऑपरेटर के पद पर पोस्टिंग की गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पोस्टिंग के बाद से आज तक वह एक दिन भी कार्यालय में उपस्थित नहीं हुआ। बावजूद इसके, सरकारी रिकार्ड में उसकी हाजिरी लगातार दर्ज होती रही और उसे हर महीने करीब 28 हजार रुपये वेतन का भुगतान भी किया जाता रहा।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह पूरा खेल हाकिम की मेहरबानी से चलता रहा, जिसमें बिना काम किए ही सरकारी खजाने से लगातार भुगतान होता रहा। आरोप है कि डाटा ऑपरेटर सरकारी ड्यूटी छोड़कर नेपाल की सैर-सपाटे और निजी ऐश-ओ-आराम में व्यस्त रहा। मामले का खुलासा तब हुआ जब अरेराज बीडीओ आदित्य दीक्षित ने फसल क्षति रिपोर्ट को लेकर कर्मचारियों की उपस्थिति की जांच शुरू की। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि डाटा ऑपरेटर कार्यालय में कभी आया ही नहीं। जब उससे संपर्क किया गया तो उसने अलग-अलग जगह ड्यूटी करने की बात कही, लेकिन पड़ताल में यह दावा भी झूठा निकला।

इसके बाद जब बीडीओ ने उसके मोबाइल और व्यक्तिगत सामान की जांच की, तो अधिकारी भी दंग रह गए। मोबाइल में कई आपत्तिजनक फोटो और वीडियो मिले, जबकि उसके पर्स से नेपाल यात्रा के होटल और रेस्टोरेंट के बिल भी बरामद हुए। इससे साफ संकेत मिला कि वह सरकारी काम की बजाय निजी मौज-मस्ती में लिप्त था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बिना किसी उपस्थिति के भी विभागीय हाकिम द्वारा उसे लगातार उपस्थित दिखाकर वेतन जारी किया जाता रहा, जिससे सरकार को हर महीने लाखों रुपये का नुकसान पहुंचता रहा।

मामला सामने आने के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। बीडीओ आदित्य दीक्षित ने बीसीओ और संबंधित डाटा ऑपरेटर से स्पष्टीकरण मांगा है और आगे की कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। फिलहाल यह मामला न सिर्फ भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि सरकारी तंत्र में बैठे मिलीभगत के खेल को भी उजागर करता है, जिससे सिस्टम की साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार