Durga Puja: गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल! मुस्लिम अध्यक्ष, दलित-महादलित कार्यकर्ता - वेटिकन सिटी की झलक, 18 लाख से सजा LWC क्लब का पंडाल
Durga Puja: पर्व-त्योहार हो या उत्सव का माहौल, जब तक उसमें आपसी एकता, भाईचारे और मोहब्बत का रंग नहीं घुलता, तब तक उसकी मिठास अधूरी रहती है।...
Durga Puja: पर्व-त्योहार हो या उत्सव का माहौल, जब तक उसमें आपसी एकता, भाईचारे और मोहब्बत का रंग नहीं घुलता, तब तक उसकी मिठास अधूरी रहती है। कटिहार का LWC क्लब इसी गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत मिसाल पेश कर रहा है। यहां मां दुर्गा की आराधना के साथ सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का संदेश भी दिया जा रहा है। खास बात यह है कि पूजा समिति के अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मुस्लिम समुदाय से आते हैं, जबकि समिति में दलित और महादलित समाज के लोग भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इस बार पूजा पंडाल को इटली के प्रसिद्ध वेटिकन सिटी की तर्ज पर तैयार किया गया है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।LWC क्लब की खासियत सिर्फ उसका भव्य पूजा पंडाल नहीं, बल्कि इसे मिल-जुलकर तैयार करने की परंपरा भी है। समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों का कहना है कि यह क्लब किसी एक धर्म या जाति का नहीं, बल्कि सभी समुदायों के लोगों का साझा गुलदस्ता है। वर्षों से अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक पृष्ठभूमि के लोग एक साथ मिलकर दुर्गापूजा का आयोजन करते आ रहे हैं।
समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और वरिष्ठ सदस्य अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े हैं। वहीं, पूजा आयोजन में विभिन्न जातियों और समुदायों के कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। यह आपसी सहभागिता बताती है कि आस्था के साथ इंसानियत, सद्भाव और सामाजिक एकजुटता भी त्योहारों की अहम पहचान है।
वेटिकन सिटी की तर्ज पर बना पंडाल, 18 लाख रुपये खर्च का अनुमान
इस बार LWC क्लब ने अपने पूजा पंडाल को नया और आकर्षक स्वरूप देने की कोशिश की है। पंडाल की थीम इटली स्थित वेटिकन सिटी से प्रेरित है। इसकी सजावट और निर्माण में बंगाल से आए कारीगरों की मदद ली गई है। समिति के अनुसार, पंडाल के निर्माण पर लगभग 18 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
LWC क्लब के सचिव संजय महतो ने बताया कि इस बार वेटिकन सिटी की तर्ज पर पंडाल तैयार करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का मकसद केवल आकर्षक सजावट करना नहीं, बल्कि लोगों के बीच आपसी भाईचारे और एकता का संदेश पहुंचाना भी है।
सभी धर्मों और जातियों का साझा गुलदस्ता है LWC क्लब
संजय महतो के मुताबिक, समिति में अलग-अलग समुदायों के लोग मिलकर काम करते हैं। अध्यक्ष मुस्लिम समुदाय से हैं, जबकि आयोजन से जुड़े कई सदस्य दलित और महादलित समाज से आते हैं। सभी लोग मिलकर पूजा की तैयारियों से लेकर व्यवस्था संभालने तक अपनी भूमिका निभाते हैं।समिति के सदस्यों का मानना है कि जब अलग-अलग धर्मों और जातियों के लोग एक साथ किसी पर्व को मनाते हैं, तो समाज में आपसी विश्वास मजबूत होता है। यही वजह है कि LWC क्लब का पूजा आयोजन धार्मिक उत्सव के साथ सामाजिक सद्भाव की पहचान भी बन रहा है।
कटिहार से भाईचारे का पैगाम
आज जब समाज में आपसी सौहार्द और एकजुटता की जरूरत पर लगातार जोर दिया जाता है, ऐसे में LWC क्लब की पहल एक सकारात्मक संदेश देती है। मां दुर्गा की आराधना के लिए तैयार किया गया यह पंडाल लोगों को याद दिलाता है कि त्योहारों की असली खूबसूरती सिर्फ रोशनी, सजावट और भव्यता में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां बांटने में है।कटिहार का LWC क्लब अपनी इसी साझा परंपरा के जरिए गंगा-जमुनी तहजीब को जीवंत रखे हुए है। वेटिकन सिटी की झलक दिखाता पंडाल और उसे तैयार करने में जुटे विभिन्न समुदायों के लोग इस बात की मिसाल हैं कि आपसी एकता और भाईचारे से हर उत्सव और भी खास बन सकता है।
रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह