Bihar News: किसान दीदियां बना रहीं जूट की राखी, खोई पहचान लौटाने की कवायद

Bihar News:कभी जूट की बंपर पैदावार और दो-दो जूट मिलों के कारण कटिहार की पहचान दूर-दूर तक जूट नगरी के रूप में हुआ करती थी।

Katihar Revives Its Jute City Identity With Handmade Jute Ra
किसान दीदियां बना रहीं जूट की राखी- फोटो : reporter

Bihar News:कभी जूट की बंपर पैदावार और दो-दो जूट मिलों के कारण कटिहार की पहचान दूर-दूर तक जूट नगरी के रूप में हुआ करती थी। वक्त बदला, जूट का कारोबार सिमटा और धीरे-धीरे यह पहचान भी धुंधली पड़ने लगी। अब एक बार फिर कटिहार को उसकी पुरानी पहचान दिलाने की कवायद शुरू हो गई है। कृषि आधारित संस्था आत्मा किसानों और जीविका से जुड़ी महिला दीदियों के साथ मिलकर जूट के वैल्यू एडेड प्रोडक्ट तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।

इसी पहल के तहत भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन इस बार कटिहार के लिए जूट की नई कहानी लेकर आया है। किसान और महिला दीदियां मिलकर जूट से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। करीब 100 महिलाओं को जूट से जुड़े विभिन्न उत्पादों के साथ-साथ जूट की राखी बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के बाद ये महिलाएं खुद राखियां तैयार कर उन्हें स्थानीय बाजार तक पहुंचाने में जुटी हैं।महिलाओं के हाथों से तैयार की जा रही ये राखियां न सिर्फ पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि कटिहार की पारंपरिक पहचान को भी नया आधार दे रही हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले इन उत्पादों से महिलाओं के लिए रोजगार और आमदनी के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। जूट को सिर्फ कच्चे माल के तौर पर बेचने के बजाय उससे तैयार उत्पाद बनाकर बाजार तक पहुंचाने की यह पहल किसानों और महिला समूहों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित हो सकती है।

राखी के जरिए बाजार में दस्तक

जूट की राखी बनाने वाली किसान और दीदियां लोगों से अपील कर रही हैं कि इस बार रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर जूट से बनी राखी बांधें। उनका कहना है कि स्थानीय उत्पाद को अपनाने से एक तरफ कटिहार के किसानों और महिला कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर जूट जैसे प्राकृतिक रेशे को बढ़ावा मिलेगा।महिलाओं की कोशिश सिर्फ राखी तक सीमित नहीं है। जूट से बैग, सजावटी सामान और दूसरे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट तैयार कर बाजार में उतारने की योजना है। मकसद साफ है—जूट को खेत से निकालकर सीधे तैयार उत्पाद के रूप में बाजार तक पहुंचाया जाए, ताकि किसानों और महिलाओं को उनकी मेहनत का बेहतर मूल्य मिल सके।

घर-घर पहुंचे जूट के उत्पाद

कटिहार को दोबारा जूट नगरी की पहचान दिलाने की यह पहल अभी छोटी शुरुआत जरूर है, लेकिन इसके पीछे बड़ा सपना है। आने वाले दिनों में जूट से बने उत्पादों को स्थानीय बाजार से आगे घर-घर तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। अगर यह अभियान बाजार में अपनी जगह बनाने में सफल रहा, तो जूट की खेती से जुड़े किसानों के साथ-साथ महिला उद्यमिता को भी नई रफ्तार मिल सकती है।रक्षाबंधन की जूट राखी इस लिहाज से महज एक त्योहार का उत्पाद नहीं, बल्कि कटिहार की पुरानी पहचान को नए अंदाज में जिंदा करने की कोशिश है। खेतों में पैदा होने वाला जूट अब महिलाओं के हुनर के जरिए बाजार में अपनी नई पहचान बनाने की राह पर है।

रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह