जहानाबाद जिला परिषद में बड़ा 'खेला': अध्यक्ष रानी कुमारी को दोहरा राजनीतिक झटका: मखदुमपुर विधानसभा के बाद अब प्रधानी भी गई! राजद को बड़ा नुकसान
जहानाबाद जिला परिषद अध्यक्ष रानी कुमारी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित। 11 सदस्यों ने विरोध में किया मतदान। उपाध्यक्ष संगीता देवी ने बचाई अपनी कुर्सी। जानें पूरी राजनीतिक हलचल।
Jahanabad - : बिहार के जहानाबाद जिले की राजनीति में शनिवार को एक बड़ा भूचाल आ गया। जिला परिषद अध्यक्ष रानी कुमारी के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हो गया, जिससे उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में आयोजित विशेष बैठक में हुए मत विभाजन ने रानी कुमारी के राजनीतिक करियर को एक और गहरा जख्म दे दिया है। दिलचस्प बात यह रही कि जहां अध्यक्ष पद पर गाज गिरी, वहीं उपाध्यक्ष संगीता देवी चालाकी से अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहीं।
विरोध में 11 वोट, समर्थन में सन्नाटा: रानी कुमारी का सूपड़ा साफ!
बैठक में कुल 13 पार्षदों में से 11 सदस्य शामिल हुए। अध्यक्ष रानी कुमारी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर जब मतदान कराया गया, तो परिणाम चौंकाने वाले रहे। सभी 11 सदस्यों ने एकजुट होकर अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। रानी कुमारी के समर्थन में एक भी वोट नहीं पड़ा। यह शर्मनाक हार जहानाबाद जिला परिषद की राजनीति में रानी कुमारी के बढ़ते अलगाव को साफ बयां करती है। खुद रानी कुमारी और एक अन्य पार्षद इस महत्वपूर्ण बैठक से नदारद रहे, जिसे उनकी हार स्वीकार करने के रूप में देखा जा रहा है।
उपाध्यक्ष संगीता देवी की 'जादुई' वापसी: अविश्वास प्रस्ताव खारिज!
अध्यक्ष की कुर्सी छीनने के बाद, घोसी भाग दो की पार्षद और उपाध्यक्ष संगीता देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान हुआ। इस दौरान कुल 11 मत पड़े, जिनमें से एक मत अवैध घोषित कर दिया गया। शेष 10 वैध मत अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में पड़े। इसका मतलब है कि संगीता देवी के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुरी तरह खारिज हो गया और वह अपनी कुर्सी बचाने में पूरी तरह सफल रहीं। यह परिणाम जिले की राजनीति में नए समीकरण बनने की ओर इशारा कर रहा है।
दोहरा राजनीतिक झटका: मखदुमपुर विधानसभा के बाद अब प्रधानी भी गई!
रानी कुमारी के लिए यह हाल के दिनों में दूसरा बड़ा राजनीतिक झटका है। इससे पहले, 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने मखदुमपुर सीट से लोजपा (रामविलास) के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें करीब दो हजार वोटों के मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। अब जिला परिषद अध्यक्ष पद का जाना उनके राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ा 'सेटबैक' माना जा रहा है, क्योंकि अविश्वास प्रस्ताव 2024 में ही लाया गया था, लेकिन कोर्ट के हस्तक्षेप के कारण टल गया था।
डीएम की मौजूदगी में हुआ 'दूध का दूध, पानी का पानी'
मत विभाजन की पूरी प्रक्रिया जिलाधिकारी (डीएम) अलंकृत पांडे की सीधी निगरानी में संपन्न हुई। उनके अलावा मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद, डॉ. प्रीति, जिला पंचायत राज पदाधिकारी सुजीत कुमार और अन्य आला अधिकारी भी मौजूद रहे। मतदान प्रक्रिया में जिला परिषद सदस्य आभा रानी, सुशीला देवी, अभिषेक रंजन, मिन्तु देवी, अजित मिस्त्री, सुधीर चौधरी, संगीता देवी, रेणु कुमारी, शांति देवी, अजय सिंह और संगीता देवी ने हिस्सा लिया। अब जिला परिषद में नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसके लिए जल्द ही तिथि की घोषणा की जाएगी।