Jamui sulfas incident: चॉकलेट समझकर खा लिया सल्फास! जमुई में एक बच्ची की मौत, 3 जिंदगी की जंग लड़ रहीं

Jamui sulfas incident: जमुई में चार बच्चियों ने चॉकलेट समझकर सल्फास खा लिया। इलाज के दौरान एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चियों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

Jamui sulfas incident
चॉकलेट समझकर खाया सल्फास- फोटो : freepik

Jamui sulfas incident: बिहार के जमुई जिले से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। खैरा प्रखंड के गम्हरिया गांव में चार सहेलियों ने सड़क पर पड़ी सल्फास की गोली को चॉकलेट समझकर खा लिया। इसके बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। इलाज के दौरान एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चियों का इलाज चल रहा है।जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर स्कूल से लौटने के बाद चारों बच्चियां घास काटने के लिए बहियार की ओर गई थीं। सभी बच्चियां गम्हरिया गांव की रहने वाली हैं और उत्क्रमित मध्य विद्यालय गम्हरिया में पढ़ाई करती हैं।

सल्फास की गोली खाने से मौत

बताया गया कि बहियार के पास एक पुल पर बैठी बच्चियों की नजर सड़क पर पड़े एक कागज में लिपटी हुई सल्फास की गोली पर पड़ी। बच्चियों ने उसे चॉकलेट समझ लिया। इसके बाद उन्होंने गोली को तोड़कर आपस में बराबर-बराबर बांट लिया और खा लिया। कुछ समय बाद चारों बच्चियां अपने-अपने घर पहुंच गईं। शाम होते-होते उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें उल्टियां होने लगीं। जब परिवार के लोगों ने उनसे पूछताछ की तो पूरे मामले की जानकारी सामने आई। घटना का पता चलते ही गांव में अफरातफरी मच गई।

बच्चियों को इलाज के लिए जमुई सदर अस्पताल ले जाया गया

इसके बाद सभी बच्चियों को इलाज के लिए जमुई सदर अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया। एक बच्ची की हालत बेहद गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया। गंभीर रूप से बीमार बच्ची की पहचान गम्हरिया गांव निवासी महेश ठाकुर की 12 वर्षीय बेटी संजना कुमारी के रूप में हुई। वह सातवीं कक्षा की छात्रा थी। परिजनों ने उसे पटना ले जाने के बजाय एक निजी क्लीनिक में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, अन्य तीन बच्चियों का इलाज जारी है। उनकी पहचान सहदेव ठाकुर की 13 वर्षीय बेटी भारती कुमारी, सुनील ठाकुर की 12 वर्षीय बेटी लवली कुमारी और रणधीर कुमार ठाकुर की 11 वर्षीय बेटी शबनम कुमारी के रूप में हुई है।

एक मासूम बच्ची की जान ले ली

घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। एक छोटी सी गलती ने एक मासूम बच्ची की जान ले ली, जबकि तीन अन्य बच्चियां अस्पताल में जिंदगी की लड़ाई लड़ रही हैं। यह घटना बच्चों की सुरक्षा और जहरीले पदार्थों को खुले में फेंकने के खतरे को भी उजागर करती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने और खतरनाक रसायनों के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था करने की मांग की है।