अब जेल में कटेगी बाकी जिंदगी! माले नेता जितेंद्र पासवान को उम्रकैद, गोपालगंज हत्याकांड में 4 साल बाद मिला इंसाफ

गोपालगंज की जिला अदालत ने 2021 के चर्चित अटल पांडेय हत्याकांड में पूर्व माले प्रत्याशी जितेंद्र पासवान को उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

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Gopalganj - गोपालगंज के बहुचर्चित अटल पांडेय हत्याकांड में न्याय का इंतजार खत्म हुआ और जिला अदालत ने दोषियों को कड़ा सबक सिखाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने भोरे विधानसभा क्षेत्र के पूर्व सीपीआई (माले) प्रत्याशी जितेंद्र पासवान को मुख्य रूप से दोषी पाते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई। न्यायालय ने इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसे अदा न करने पर एक साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

यह पूरा मामला दिसंबर 2021 का है, जब कोरेयां गांव में भूमि विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। विवाद के दौरान आरोपियों ने धारदार चाकू से अटल पांडेय पर हमला कर दिया था, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद इलाके में व्यापक आक्रोश फैल गया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की थी और मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा था।

न्यायालय की कार्यवाही के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। ए.पी.पी. परवेज आलम ने अदालत में कई अहम साक्ष्य और चश्मदीद गवाहों को पेश किया, जिन्होंने वारदात की पुष्टि की। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि यह हत्या पूर्व नियोजित और जघन्य थी, इसलिए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। अदालत ने सभी गवाहों के बयानों और तकनीकी साक्ष्यों का सूक्ष्म परीक्षण करने के बाद आरोपियों को दोषी पाया।

सजा सुनाते समय अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि भूमि विवाद जैसे मुद्दों पर कानून को हाथ में लेना और किसी की जान लेना समाज में अस्थिरता पैदा करता है। ऐसे अपराधों में कठोर दंड न केवल न्याय सुनिश्चित करता है, बल्कि समाज के अन्य अपराधियों के लिए एक नजीर भी पेश करता है। अदालत ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें उचित मुआवजा देने का भी आदेश दिया है, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके।

इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने संतोष व्यक्त करते हुए न्यायपालिका का आभार जताया है। स्थानीय लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि रसूखदार नेताओं के शामिल होने के बावजूद कानून ने अपना काम निष्पक्षता से किया। अधिवक्ता परवेज आलम ने इसे कानून की बड़ी जीत बताया और कहा कि इस निर्णय से आम जनता का न्याय प्रणाली पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

Report - Namo narayan mishra