Bihar News : गया के किसान ने जीवन बीमा की तर्ज पर शुरू की सफेद चंदन की खेती, 1 लाख की लागत से ₹2 करोड़ के मुनाफे की उम्मीद
Bihar News : गया के युवा किसान राजू कुमार ने एक अनोखी और दूरदर्शी पहल की है। उन्होंने 'जीवन बीमा' की तर्ज पर लॉन्ग-टर्म इंवेस्टमेंट के रूप में सफेद चंदन की खेती की शुरुआत की है.....पढ़िए आगे
GAYAJI : बिहार के गया में जीवन बीमा की तर्ज पर सफेद चंदन की खेती शुरू की गई है. जिस तरह से जीवन बीमा 10 साल, 12 साल, 15 साल या अधिक समय के लिए होती है, ठीक उसी तर्ज पर गया के किसान राजू कुमार ने छप्पर फाड़ मैच्योरिटी के लिए सफेद चंदन की खेती लगाई है. इनका मानना है, कि जिस तरह से सफेद चंदन की खेती अभी फल-फूल रही है. यदि आने वाले सात-आठ सालों में यही स्थिति रही, तो कम से कम 2 करोड रुपए की आमदानी तय है. जबकि इस पर अब तक की लागत महज लाख रुपए ही आई है और आने वाले दिन में इस पर खर्च भी शून्य है. सिर्फ थोड़ी सी देख-देख से चंदन की खेती पूरी तरह से फल- फूल उठेगी.
जीवन बीमा की तर्ज पर खेती का अनोखा आइडिया
बिहार में अधिकांशत: किसान सीजनली पारंपरिक खेती करने में ही ज्यादा विश्वास रखते हैं. पारंपरिक खेती लगाओ.. काटो और कमाओ पर ही बिहार के किसान ज्यादा निर्भर रहते हैं. इससे इतर गया के टिकारी प्रखंड के उर गांव के किसान राजू कुमार ने सफेद चंदन की खेती की शुरुआत की है. सफेद चंदन की खेती की शुरुआत उन्होंने बड़ी सोच के साथ की है. जिस तरह से जीवन बीमा लोग करते हैं, इनकी सफेद चंदन की खेती भी उसी तर्ज पर शुरू की गई है. यह उनकी अनोखी सोच यूट्यूब देखकर आई. पहले तो इन्होंने कई राज्यों में घूम कर सफेद चंदन की खेती के बारे में जाना. फिर संतुष्ट हुए तो अपने गांव में सफेद चंदन की खेती शुरू कर दी.
60 पेड़ लगाए, 50 पेड़ 7-8 फीट से भी ज्यादा लंबे हो गए
3 साल पहले राजू कुमार ने चंदन की खेती की शुरुआत की थी. तब यूपी के फैजाबाद से उन्होंने 100 पौधे लाए थे. 100 पौधे में से 40 खराब हो गए. साठ पौधों को खेत में लगाया. 60 में से 10 पौधे नहीं लग पाए. किंतु 50 पौधे लगातार खिल रहे हैं. जैसे-जैसे ये 50 सफेद चंदन के पौधे खिल रहे हैं. वैसे-वैसे राजू कुमार के चेहरे की मुस्कान भी बढ़ती जा रही है. अभी इनके खेतों में लगी सफेद चंदन की खेती 4 सालों की हो चुकी है. 7 से 8 फीट से भी ज्यादा लंबे चंदन के पेङ हो गए हैं. पत्तियां लहलहाने लगी हैं. आने वाले सात-आठ सालों में इसी प्रकार सब कुछ सही चलता रहा, तो चंदन की खेती कर किसान राजू कुमार मालोमाल हो जाएंगे.
एक पेड़ से 20 किलो चंदन की लकड़ी निकलती है
किसान राजू कुमार के अनुसार चंदन की खेती अत्यंत ही मुनाफे वाली है. यह बताते हैं, कि एक चंदन के पेड़ से कम से कम 20 किलो लकड़ी निकलती है. 1 किलो लकड़ी का वर्तमान में बाजार मूल्य करीब 20 हजार रुपए प्रति किलो है. इसकी पत्तियां भी उपयोग में आती है. यदि एक पेड़ से 20 किलो चंदन की लकड़ी निकलती है और 20 हजार रुपए किलो बिकता है, तो वह कम से कम 4 लाख रुपए देगी. वही, आने वाले 8 सालों में तो इसकी कीमत और बढ़ जाएगी. क्योंकि हर सामानों की कीमतों में इजाफा हो रहा है, तो इसकी भी कीमत काफी बढ़ेगी और जो अनुमानित मुनाफा होना है, वह चार लाख से भी ज्यादा हो जाएगा. इस तरह 50 पेड़ जो अभी हरे भरे और बड़े हो गए हैं, उससे कम से कम 2 करोड़ से अधिक के मुनाफे की संभावना है.
एक बार लगाओ, हल्की मेहनत और फिर 10-12 साल बाद करोड़पति
जीवन बीमा तर्ज पर इसकी खेती शुरू करने वाले राजू कुमार बताते हैं, कि उन्होंने इस सोच के साथ इसकी खेती लगाई है, कि एक बार लगाओ.. मामूली मेहनत और फिर 12 साल में करोड़पति वाली मैच्योरिटी. राजू कुमारी यह भी बताते हैं, कि उन्होंने जब सफेद चंदन की खेती लगाई थी, तो लोग हंसते थे. कहते थे, कि यह पागल हो गया है. उन्हें सफेद चंदन की खेती के बारे में कुछ पता ही नहीं था. लोग यूं ही बातें करते थे और हंसते थे, लेकिन जैसे ही सफेद चंदन की खेती बढ़ रही है. सफेद चंदन के पेङ बढ रहे हैं, तो लोगों को समझ में आ रहा है, कि यही युवा किसान सही था. मेरे मन में यह आइडिया तभी आया था, जब धनबाद में उन्होंने सफेद चंदन की खेती को देखा. लगा कि जब कोयले पर सफेद चंदन उग सकता है, तो गया में यह क्यों नहीं हो सकता और फिर इसी को लेकर मन में ठाना और पूरी छानबीन के बाद सफेद चंदन की खेती शुरू की है.
यूट्यूब पर देखते-देखते आइडिया आया
बताते हैं, कि यूट्यूब पर वह वीडियो देख रहे थे. इस बीच गुजरात के प्रसिद्ध चंदन के किसान नितिन पटेल की खेती को देखा, तो उनके मन में आइडिया आया, कि वह क्यों नहीं इसकी खेती करें. जब हरियाणा और गुजरात में इसकी खेती हो सकती है, तो गया में इसकी खेती क्यों नहीं हो सकती है. इसके बाद वे यूपी, हरियाणा गए. अपने मित्र के यहां धनबाद भी गए और सफेद चंदन की खेती को लेकर पूरी जानकारी इकट्ठा की. इसके तापमान के बारे में भी जाना. सफेद चंदन की खेती के बारे में जो तापमान समझ में आया, वह गया जिले में उपयुक्त है और यही वजह रही कि यूट्यूब से आइडिया मिलते ही उन्होंने इसकी खेती शुरू की.
पारंपरिक खेती में ज्यादा मुनाफा नहीं
बताते हैं, कि पारंपरिक खेती जैसे धान गेहूं की हम लोग खानदानी तौर पर करते आए हैं. किंतु अब इस पारंपरिक खेती में ज्यादा कुछ नहीं रह गया है. इसी से हमारे जैसे किसान नई सोच के साथ नई फसलों की खेती की शुरुआत की है. किसान राजू कुमार बताते हैं, कि सफेद चंदन की खेती किसानों के लिए मालामाल करने वाला है. वह चाहते हैं, कि गया के काफी संख्या में किसान सफेद चंदन की खेती करें. खेत में वे चंदन का पेड़ लगाएं और फिर उसी के आसपास सब्जी भी लगा दें, तो उससे प्लस इनकम भी होगा. हर साल की उपज भी होती रहेगी और चंदन भी बढ़ता रहेगा. उन्होंने देखा है, कि दूसरे राज्यों में मेङ पर भी सफेद चंदन की खेती लगी हुई है.
जीवन बीमा की सोच के साथ सफेद चंदन की खेती पर इन्वेस्ट किया
राजू कुमार बताते हैं, कि जीवन बीमा की तर्ज पर सफेद चंदन की खेती में इन्वेस्ट किया है. जिस तरह 12 -15 साल के बाद बेटी की शादी के लिए लोग जीवन बीमा में फिक्स करते हैं,,तो हमने उसी तर्ज पर चंदन की खेती शुरू की है. क्योंकि 12- 15 साल में यह धन उगलने लगेगा. एक पौधे से कम से कम 4 लाख की आमदनी होगी, तो 50 पौधे हैं, तो 2 करोड रुपए से अधिक आमद आएगी. क्योंकि उस समय रेट और बढ़ जाएंगे. अभी 4 साल के पौधे हुए हैं. 8 साल बाद इसके रेट और बढ़ेंगे तो और ज्यादा इनकम भी होगी. जिस तरह से सफेद चंदन की खेती फल-फूल रसी है, उन्हें पूरी संभावना है, कि सफेद चंदन की खेती सफल होगी और वह मालोमाल जरूर होंगे. बताते हैं, कि उनके मित्र धनबाद में है, जो सफेद चंदन की खेती कर रहे हैं, तो उनके यहां भी गया और फैजाबाद, मुरादाबाद में भी गया और पूरी जानकारी इकटठी की. 60 वृक्ष की खेती में लगाए थे. किंतु 10 पेड़ सूख गए. बताते हैं कि चंदन की खेती के लिए 12×12, 15-15 का स्पेस रखना चाहिए. गया की जलवायु इसके लिए उपयुक्त है. क्योंकि यहां ज्यादा गर्मी पड़ती है और ठंड भी पड़ती है और यही जलवायु इसके लिए उपयुक्त है. 6.5 से लेकर 7.5 पीएच मान चेक करवाए थे. बताया गया, कि गया की जलवायु उपयुक्त है. अभी तक यह पूरी तरह से सफल है. सिर्फ हल्की-फुल्की कभी कभार मेहनत करनी पड़ती है. दीमक का दवा देते हैं और थोड़ा बहुत पटाते हैं. यह दक्षिण भारत की खेती जरूर है. किंतु सफेद चंदन कई राज्यों में होता है. सबसे बड़ी बात है, कि यह अपने सहायक पौधे से भोजन लेता है. सहायक पौधे के तौर पर करजानी, मीठा नीम, लाल साग आदि होते हैं. वह पारंपरिक खेती से देखे हुए हैं, कि किसान खेती करते-करते मर जाता है, किंतु उसे ज्यादा कमाई नहीं हो पाती है. इसी को लेकर उन्होंने सफेद चंदन की खेती शुरू की. बताते हैं कि अभी 7-8 फीट या 9 फीट का हुआ सफेद चंदन का पेड़ का कोई वैल्यू अभी नहीं है. क्योंकि लकड़ी की कोई वैल्यूएशन नहीं होती है. इसमें जब सुगंध आएगा, तो इसकी वैल्यू होनी शुरू हो जाएगी. आने वाले सालों में यह संभव हो सकेगा. गया एरिया के किसानों को चंदन की खेती के बारे में कोई पता नहीं है. चंदन की खेती जब सफल हो जाएगी, तो इसकी बिक्री करेंगे. इसके लिए कृषि विभाग- सरकार से एनओसी लेना पड़ता है. सफेद चंदन से इतर बनती है, आयुर्वेदिक दवा के तौर पर भी इसका उपयोग होता है. चंदन का तेल भी निकलता है, वही पूजा पाठ में भी इसका उपयोग होता है. सफेद चंदन की काफी बाजार में डिमांड रहती है. सफेद चंदन का लकड़ी 20 हजार रूपए किलो बिकता है. वह किसानों से कहेंगे, कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ सफेद चंदन की खेती भी करें, तो यह जीवन बीमा की तरह आपको लाभ देगा. यदि आपको लाभ नहीं दिया, तो आपके परिवार को जरूर देगा. गया पठारी एरिया है. पठारी एरिया में ही सफेद चंदन की खेती होती है. हम लोग जहां है, वह पठारी एरिया है और इसी कारण यहां सफेद चंदन की खेती सफल हो रही है. बताते हैं, कि मुरादाबाद से उन्होंने सफेद चंदन के पौधे लाए थे. प्रति पौधे 300 रूपए पड़े थे. 50 हजार एकमुश्त खर्च हुए. इसके बाद कोई खर्च नहीं रह गया है. आने वाले दिनों में सफेद चंदन की खेती हमें करोड़पति बनाएगी. वहीं, अन्य किसान भी इसकी खेती करेंगे, तो वह भी करोड़पति जरूर बनेंगे. बताते हैं, कि शुरुआती साल में ही सिर्फ दिक्कत होती है. इसके बाद कोई दिक्कत सफेद चंदन की खेती में नहीं रह जाती है. सफेद चंदन की खेती कर कम से कम 2 करोड रुपए की आमदनी का उन्हें पूरा अनुमान है.
मनोज की रिपोर्ट