Saran News: सारण के अभिषेक कुमार सिंह बने भारतीय सेना में अधिकारी, IMA देहरादून से पूरा किया प्रशिक्षण

Saran के लाल अभिषेक कुमार सिंह बने भारतीय सेना में अधिकारी! सैनिक स्कूल नालंदा के पूर्व छात्र और पूर्व सैनिक के पुत्र अभिषेक ने IMA देहरादून से पास आउट होकर जिले का नाम रोशन किया है। अतरसन गांव में जश्न का माहौल

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सारण के अभिषेक कुमार सिंह बने भारतीय सेना में अधिकारी- फोटो : Reporter

बिहार के सारण जिले के रसूलपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत अतरसन गांव के युवा अभिषेक कुमार सिंह ने भारतीय सेना में कमीशंड अधिकारी बनकर पूरे जिले का मान-सम्मान बढ़ाया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से उनके परिवार, गांव और पूरे क्षेत्र में खुशी, उत्साह और गर्व का माहौल है। देश सेवा के गौरवशाली सफर पर निकले अभिषेक अब स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा के एक नए प्रतीक बन गए हैं।


पूर्व सैनिक पिता का मार्गदर्शन और सैनिक स्कूल की शिक्षा

अभिषेक कुमार सिंह के रगों में देशभक्ति का जज्बा विरासत में मिला है; वह भारतीय सेना के पूर्व सैनिक जितेन्द्र कुमार सिंह के पुत्र हैं। उन्होंने बचपन से ही अपने पिता को देश सेवा करते देख सेना की वर्दी पहनने का सपना संजोया था। पिता के कड़े अनुशासन और मार्गदर्शन ने उनके इस सपने को मजबूत आधार दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल, नालंदा से पूरी की, जिसने उनमें नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना को और प्रगाढ़ किया।


कड़े प्रशिक्षण के बाद IMA देहरादून से पास आउट

अभिषेक ने अपनी कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और लगन के बल पर प्रतिष्ठित इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA), देहरादून में प्रवेश प्राप्त किया था। वहाँ उन्होंने चार वर्षों तक बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा किया। आखिरकार, 13 जून 2026 को पासिंग आउट परेड के बाद वह भारतीय सेना में एक कमीशंड अधिकारी के रूप में शामिल हो गए, जो पूरे सारण जिले के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण बन गया।


बधाई देने वालों का तांता, युवाओं को मिलेगी प्रेरणा

अभिषेक की सफलता की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव अतरसन पहुंची, ग्रामीणों, शिक्षकों, मित्रों और शुभचिंतकों में मिठाई बांटने और बधाई देने का सिलसिला शुरू हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि अभिषेक ने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य के प्रति सच्चा समर्पण, अटूट अनुशासन और निरंतर प्रयास हो, तो किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। लोगों को पूरा विश्वास है कि उनकी यह कामयाबी क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी सेना में जाकर देश सेवा करने के लिए प्रेरित करेगी।

रिपोर्ट - धर्मेंद्र रस्तोगी