सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान का नया रिकॉर्ड : 87.16% वोटिंग के साथ टूटा पिछला रिकॉर्ड, शिक्षकों की राजनीति में बढ़ी भागीदारी
बिहार विधान परिषद के 8 सीटों पर शुक्रवार को हुए मतदान में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में वोटिंग का नया रिकॉर्ड बना है। इस बार कुल 87.16 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, जिसने पिछले सभी चुनावों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है...
Chapra : सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए हुए वर्ष 2026 के चुनाव में मतदान का नया रिकॉर्ड बना है। इस बार कुल 87.16 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, जिसने पिछले सभी चुनावों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह बढ़ता हुआ मतदान प्रतिशत शिक्षक समुदाय की राजनीतिक सक्रियता और अपने जनप्रतिनिधि के चयन के प्रति उनकी गहरी जागरूकता को दर्शाता है। इससे पहले वर्ष 2014 में 70 प्रतिशत, वर्ष 2020 में 85 प्रतिशत और वर्ष 2023 के उपचुनाव में 83.50 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था।
चार दशक तक भाकपा का वर्चस्व और राजनीतिक इतिहास
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो इस पर लंबे समय तक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) का प्रभाव रहा है। वर्ष 1978 से शुरू हुए इस सफर में भाकपा के जयमंगल सिंह ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की। वर्ष 1996 में कांग्रेस के चंद्रमा सिंह ने इस सिलसिले को तोड़ा। इसके बाद केदारनाथ पांडेय ने वर्ष 2002, 2008, 2014 और 2020 में लगातार चार चुनाव जीतकर इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई। हालांकि, उनके निधन के बाद वर्ष 2023 के उपचुनाव में समीकरण बदले और जन सुराज समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी अफाक अहमद ने केदारनाथ पांडेय के पुत्र आनंद पुष्कर को 674 मतों के अंतर से पराजित कर दिया।
इस बार एनडीए से आनंद पुष्कर और जन सुराज से अफाक अहमद मैदान में
वर्ष 2026 के इस चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि भाकपा ने अपना कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा। पिछले उपचुनाव में भाकपा के टिकट पर लड़ने वाले आनंद पुष्कर इस बार जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के टिकट पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि अफाक अहमद जन सुराज के उम्मीदवार के रूप में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस राजनीतिक बदलाव ने इस बार के मुकाबले को बेहद दिलचस्प और नया संदर्भ दे दिया है।
सारण, सीवान और चंपारण तक फैला है निर्वाचन क्षेत्र का दायरा
यह निर्वाचन क्षेत्र केवल छपरा या सारण जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा कई जिलों में फैला है। वर्ष 2020 के चुनाव आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र में सारण, सीवान, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और पश्चिमी चंपारण के शिक्षक मतदाता शामिल हैं। पिछले चुनावों में भी विभिन्न जिलों के इन मतदाताओं ने ही हार-जीत का फैसला तय किया था। यही वजह है कि यहां के उम्मीदवारों को सभी संबंधित जिलों के शिक्षकों के बीच जाकर उनकी समस्याओं और मुद्दों को समझना पड़ता है।
प्रतिनिधित्व की बढ़ती अहमियत और शिक्षकों की उम्मीदें
लगातार बढ़ते मतदान प्रतिशत (2014 के 70% से बढ़कर 2026 में 87.16% तक पहुंचना) से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षक समुदाय अपने पेशेवर हितों, वेतनमान, पेंशन, पदोन्नति और शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर कितना गंभीर है। अधिक मतदान से निर्वाचित होने वाले प्रतिनिधि पर शिक्षकों की अपेक्षाओं को सदन में प्रभावी ढंग से उठाने की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। अब सभी की निगाहें आगामी परिणामों पर टिकी हैं जो यह तय करेंगे कि इस बार शिक्षक समुदाय ने किसके हाथ में अपना नेतृत्व सौंपा है।
धर्मेन्द्र की रिपोर्ट