खतरे में विक्रमशिला सेतु : अगुवानी हादसे से भी नहीं लिया सबक? सरकारी 'ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी' फेल, गंगा की लहरों में ढह रहा सुरक्षा कवच

अगुवानी हादसे के बाद बनी 'ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी' विक्रमशिला सेतु को बचाने में नाकाम। पिलरों की सुरक्षा दीवार ध्वस्त, मुख्य ढांचे पर खतरा। क्या बिहार एक और पुल हादसे की ओर बढ़ रहा है?

खतरे में विक्रमशिला सेतु : अगुवानी हादसे से भी नहीं लिया सबक
विक्रमशीला सेतु का सुरक्षा कवच टूटा.- फोटो : anjanee kumar kashyap

Bhagalpur - : अगुवानी पुल हादसे के बाद नीतीश सरकार ने बड़े ताम-झाम के साथ 'ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी' की घोषणा की थी, लेकिन विक्रमशिला सेतु की बदहाली ने इस नीति की पोल खोल दी है। पिलरों की सुरक्षा दीवार ध्वस्त होने से अब मुख्य ढांचे पर जलसमाधि का खतरा मंडरा रहा है।

कागजी साबित हुई 'ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी'

खगड़िया के अगुवानी-सुल्तानगंज पुल हादसे के बाद बिहार सरकार ने राज्य के सभी महासेतुओं की सेहत सुधारने के लिए एक विशेष 'ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी' शुरू की थी। इसके तहत हर बड़े पुल के लिए एक समर्पित निगरानी टीम गठित की गई थी, जिसका काम नियमित जांच और समय पर मरम्मत सुनिश्चित करना था। लेकिन विक्रमशिला सेतु की वर्तमान स्थिति चीख-चीख कर कह रही है कि ये टीमें और नीतियां केवल फाइलों तक सीमित रह गई हैं। करोड़ों के बजट के बावजूद, पुल के पिलरों का सुरक्षा कवच (प्रोटेक्शन वॉल) गंगा की भेंट चढ़ गया है।

पिलर संख्या 16 से 20: खतरे की लाइव लोकेशन

ताजा रिपोर्ट के अनुसार, विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या 16 से 20 के बीच की स्थिति अत्यंत संवेदनशील है। पिलर संख्या 16 का प्रोटेक्शन वॉल पूरी तरह जमींदोज हो चुका है, जबकि दो अन्य पिलरों की दीवारें क्षतिग्रस्त होकर मौत की तरह लटक रही हैं। स्थानीय विशेषज्ञों का कहना है कि ये लटकते हुए भारी मलबे लगातार मुख्य पिलर से टकरा रहे हैं, जिससे पुल की नींव कमजोर हो रही है। यदि तुरंत सुध नहीं ली गई, तो अगुवानी जैसा मंजर दोहराने में देर नहीं लगेगी।

एक्सपेंशन जॉइंट: 1 इंच से 6 इंच का 'डेथ गैप'


पुल के ऊपरी हिस्से की कहानी और भी डरावनी है। विभिन्न स्पैन के बीच का एक्सपेंशन जॉइंट, जो कभी महज 1 इंच था, अब बढ़कर 6 इंच से ज्यादा हो गया है। पुल निर्माण निगम की इस घोर लापरवाही ने राहगीरों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। भारी वाहनों के गुजरते समय होने वाले कंपन और पिलरों पर बढ़ते दबाव के बीच प्रशासन केवल 'जांच टीम' भेजने की औपचारिकता निभा रहा है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने भी मामले की जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम अब तक सिफर है।

समृद्धि यात्रा और सुशासन का सवाल


हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आगामी 23 मार्च 2026 से अपनी 'समृद्धि यात्रा' के पांचवें चरण पर निकल रहे हैं । इस यात्रा के दौरान वे सात निश्चय-2 और 3 के तहत बुनियादी ढांचे और 'सुलभ संपर्कता' की समीक्षा करेंगे । लेकिन भागलपुर की इस लाइफलाइन की जर्जर हालत सरकार के 'समृद्धि' के दावों पर सवालिया निशान लगा रही है। क्या मुख्यमंत्री अपनी समीक्षा बैठकों में पुल निर्माण निगम की इस जानलेवा सुस्ती पर जवाबदेही तय करेंगे?

सीमांचल की धड़कन पर मंडराता 'जल-प्रलय'


विक्रमशिला सेतु पूर्वी बिहार और सीमांचल के करोड़ों लोगों के लिए परिवहन का एकमात्र बड़ा सहारा है। गंगा का तेज बहाव, बड़े जहाजों की टक्कर और अब सुरक्षा दीवार का ध्वस्त होना—ये तीनों कारक मिलकर एक बड़ी त्रासदी की पटकथा लिख रहे हैं। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है कि जब 'ब्रिज मेंटेनेंस' के नाम पर अलग टीमें बनी हुई हैं, तो फिर पिलर इस कदर असुरक्षित कैसे हो गए? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही नींद से जागेगा?

Report - Anjanee kumar kashyap