प्रकृति और संस्कृति का अनूठा संगम: भागलपुर संग्रहालय में ‘नवग्रह वाटिका’ का शुभारंभ, 50 से अधिक कलाकारों ने उकेरे रंग
Bhagalpur : विश्व पर्यावरण दिवस के विशेष अवसर पर भागलपुर जिले में प्रकृति और भारतीय संस्कृति की एकरूपता को दर्शाती एक बेहद अनूठी पहल की गई है। जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय के तत्वावधान में 50 जून 2026 को भागलपुर संग्रहालय एवं आम्रपाली कला प्रशिक्षण केंद्र के संयुक्त सहयोग से परिसर में व्यापक पौधरोपण अभियान चलाया गया। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन के कुशल निर्देशन में इस मौके पर ऐतिहासिक भागलपुर संग्रहालय परिसर में 'नवग्रह वाटिका' के निर्माण का विधिवत शुभारंभ किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों को भी जीवंत करेगी।
धार्मिक महत्व ही नहीं, औषधीय गुणों से भी भरपूर हैं नवग्रह वाटिका के पौधे
'नवग्रह वाटिका' की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति का हर पहलू बेहद गहराई से दृष्टिगोचर होता है। हमारी कला परंपरा और पूजन पद्धति में पृथ्वी, आकाश, नदी, पहाड़ और वनस्पतियों का विशेष स्थान है। उन्होंने बताया कि नवग्रह के पेड़-पौधों और उनकी लकड़ियों का महत्व केवल धार्मिक कर्मकांडों तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके औषधीय गुण पर्यावरण संरक्षण में अतुलनीय भूमिका निभाते हैं। यह वाटिका संदेश देती है कि प्रकृति में छोटी दूब घास का भी उतना ही महत्व है जितना कि एक विशाल पीपल के वृक्ष का होता है।
निश्चित दिशाओं में लगाए जा रहे हैं नौ विशेष पौधे, पहले दिन चार का हुआ रोपण
वैज्ञानिक और पारंपरिक विधा के अनुसार तैयार की जा रही इस विशेष वाटिका में नौ अलग-अलग प्रजातियों के पेड़-पौधे लगाए जा रहे हैं, जिनमें दूब, चिड़चिड़ी, कुश, आक, शमी, खैर, पलाश, गूलर और पीपल शामिल हैं। इन सभी पौधों को वास्तु और शास्त्र के अनुसार एक निश्चित दिशा में रोपित किया जाना तय हुआ है। पर्यावरण दिवस के इस गौरवशाली अवसर पर पहले चरण की शुरुआत करते हुए संग्रहालय परिसर में शमी, खैर, गूलर और पीपल के पौधों का अत्यंत सावधानीपूर्वक रोपण किया गया, जिनकी नियमित देखरेख स्वयं संस्थान के कर्मचारियों द्वारा की जाएगी।
चित्रकला कार्यशाला में मंजूषा और पोस्टर विधा के जरिए कलाकारों ने दिखाई प्रतिभा
विश्व पर्यावरण दिवस को कलात्मक रूप देने के लिए परिसर में "प्रकृति और संस्कृति" विषय पर आधारित एक दिवसीय भव्य चित्रकला कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों से आए 50 से अधिक उभरते हुए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कलाकारों ने अंग प्रदेश की प्रसिद्ध लोककला 'मंजूषा चित्रशैली', पोस्टर मेकिंग और समकालीन कला (कंटेम्परेरी आर्ट) विधा के माध्यम से पेड़-पौधों के महत्व को कैनवास पर जीवंत किया। इस दौरान उपस्थित वरिष्ठ कला विशेषज्ञों ने युवा कलाकारों को रंग संयोजन और रेखाचित्रों की कई बारीकियां भी सिखाईं।
सांस्कृतिक और प्रशासनिक जगत की नामचीन हस्तियां रहीं उपस्थित
संग्रहालय और कला केंद्र के इस अनूठे आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय सांस्कृतिक कर्मियों, बुद्धिजीवियों और कला प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। कार्यक्रम के दौरान कला जगत से जुड़े मनोज पंडित, उलूपी झा, अनुकृति, विशुद्धानंद, कुमार गौरव, नरेंद्र कुमार, राजेश कुमार और निशा कुमारी सहित कई अन्य गणमान्य लोग मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सभी उपस्थित अतिथियों और कलाकारों ने इस दौरान प्रकृति की रक्षा करने और अपनी समृद्ध कला संस्कृति को सहेजने का सामूहिक संकल्प लिया।
बालमुकुंद की रिपोर्ट