जदयू को यूपी में बड़ा झटका, NDA गठबंधन में नीतीश की पार्टी को नहीं मिलेगी जगह ! निशांत का भारी विरोध
जदयू ने वाराणसी में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित कर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरने का बिगुल फूंका था। इस सम्मेलन के जरिए नीतीश कुमार के बेटे और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने यूपी में पार्टी के चुनाव अभियान की शुरुआत की थी।
Bihar News : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए में बड़ा झटका लगता दिख रहा है। यूपी में चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी जदयू को भाजपा के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने गठबंधन में शामिल करने का खुलकर विरोध कर दिया है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बेटे और सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर ने साफ कहा है कि उनकी पार्टी यूपी में जदयू को एनडीए का हिस्सा नहीं बनने देगी। उन्होंने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जदयू को गठबंधन में शामिल किया गया तो सुभासपा को भी आगे के लिए कुछ और विचार करना पड़ेगा।
दरअसल, तीन दिन पहले ही जदयू ने वाराणसी में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित कर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरने का बिगुल फूंका था। इस सम्मेलन के जरिए नीतीश कुमार के बेटे और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने यूपी में पार्टी के चुनाव अभियान की शुरुआत की थी। निशांत के साथ जदयू के कई मंत्री और वरिष्ठ नेता भी वाराणसी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया था कि जदयू उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने के लिए तैयार है और पार्टी सभी को साथ लेकर आगे बढ़ेगी। इसके बाद से ही यूपी की राजनीति में जदयू की एनडीए में संभावित भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई थी।
अब सुभासपा ने इस संभावित गठबंधन पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। अरविंद राजभर ने कहा कि जब बिहार में जदयू ने सुभासपा को एनडीए का हिस्सा नहीं बनने दिया तो उत्तर प्रदेश में बिहार की किसी पार्टी को गठबंधन में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार की चाहे कोई भी पार्टी हो, उसे यूपी एनडीए में जगह नहीं मिलनी चाहिए। यदि ऐसा होता है तो सुभासपा अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नए सिरे से विचार करने को मजबूर होगी।
27 सीटों पर जदयू ने लड़ा था चुनाव
2022 में जदयू ने यूपी में अपनी चुनावी मौजूदगी दर्ज कराई थी, लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिली। जदयू ने उत्तर प्रदेश में पिछला विधानसभा चुनाव यानी 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा था। पार्टी ने कुल 27 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी थी। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार की पार्टी एक बार फिर सक्रिय हो रही है। जदयू ने तब 27 सीटों पर चुनाव लड़ा जिसमें पार्टी उम्मीदवारों को कुल 97,738 वोट मिले। यह यूपी के कुल वोट प्रतिशत का लगभग 0.1% था । इतना ही नहीं पार्टी के 26 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।
यूपी में चुनाव में उतरना चाहते हैं बिहार के ये दल
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष 2027 में होना है। करीब 3 महीने बाद होने वाले चुनाव के पहले यूपी में चुनाव लड़ने को लेकर जदयू सहित बिहार से जुड़े एनडीए के कई अन्य घटक दलों ने अपनी चुनावी दस्तक देनी शुरू कर दी है। जहाँ जदयू की ओर से निशांत ने पहल की है, वहीं अन्य दलों द्वारा भी यूपी में अपनी सम्भावना तलाशने की शुरुआत की जा चुकी है। कुछ सप्ताह पूर्व ही केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपने पिता और लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान की जयंती यूपी के लखनऊ में आयोजित किया। हालांकि सुभासपा की आपत्ति ने अब बिहार के सियासी दलों को कड़ा संदेश दिया है और उनकी यूपी की राह आसान नहीं दिख रही है।
सुभासपा को बिहार में नहीं मिली सफलता
अरविंद राजभर ने इस दौरान अपनी पार्टी के दो प्रत्याशियों के नामों का भी ऐलान किया। उन्होंने बताया कि सुभासपा आगामी विधानसभा चुनाव में आफताफ आलम और खुर्शीद आलम को मैदान में उतारेगी। दोनों पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चे से जुड़े हैं। इनमें एक अल्पसंख्यक मोर्चे के अध्यक्ष और दूसरे प्रदेश अध्यक्ष हैं।
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा ने भी एनडीए में शामिल होकर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन उसे गठबंधन में जगह नहीं मिली। इसके बाद पार्टी ने बिहार में अकेले चुनाव लड़ा, हालांकि उसे सफलता नहीं मिली। अब उसी राजनीतिक घटनाक्रम का हवाला देकर सुभासपा यूपी में जदयू की एंट्री का विरोध कर रही है। ऐसे में निशांत कुमार के नेतृत्व में यूपी चुनाव अभियान शुरू करने वाली जदयू के सामने एनडीए में जगह बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है। भाजपा के लिए भी सहयोगी दलों के बीच तालमेल बनाए रखना आसान नहीं होगा।
कौन है सुभासपा
उत्तर प्रदेश में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) का मुख्य जातीय आधार राजभर समुदाय है। उत्तर प्रदेश में राजभर समाज की आबादी लगभग 2.9 प्रतिशत मानी जाती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय है और पूर्वांचल की करीब 66 विधानसभा सीटों पर इस समाज का अच्छा प्रभाव माना जाता है। सुभासपा राजभर समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) की श्रेणी में शामिल करने की मांग करती रही है तथा सामाजिक-आधारित आरक्षण को सही से लागू करने पर जोर देती है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर हैं, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं।