NEET कांड के बाद परीक्षा तंत्र का इम्तिहान, NTA को तकनीक के साथ भरोसे पर भी सवाल, कमांड सेंटर से कितनी बदलेगी तस्वीर? पढ़िए

NEET paper leak: नीट प्रश्नपत्र लीक के बाद देश जिस छात्र आक्रोश और बेचैनी से दो-चार हुआ, उसने मुल्क की परीक्षा व्यवस्था पर एक तल्ख सवाल खड़ा कर दिया है।...

NEET Row NTA Must Restore Trust With Security and Accountabi
पेपर लीक के दाग के बीच NTA का सुरक्षा कवच- फोटो : social Media

NEET paper leak: नीट प्रश्नपत्र लीक के बाद देश जिस छात्र आक्रोश और बेचैनी से दो-चार हुआ, उसने मुल्क की परीक्षा व्यवस्था पर एक तल्ख सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि उन लाखों नौजवानों के मुस्तकबिल का है, जो वर्षों की मेहनत और उम्मीद के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं। जब पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और नतीजों में गड़बड़ी की खबरें आम होने लगें तो व्यवस्था की साख पर सवाल उठना लाजिमी है।

ऐसे माहौल में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए का इंटेलिजेंस, कानून-प्रवर्तन एजेंसियों और डिफेंस फोर्सेज के अनुभवी अफसरों को परीक्षा सुरक्षा कमांड सेंटर में शामिल करने का फैसला स्वागतयोग्य है। प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर एन्क्रिप्शन, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज, वितरण और रियल-टाइम निगरानी तक हर मरहले की निगरानी मजबूत करना वक्त की जरूरत है। एआई, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन, सीसीटीवी और परीक्षा के बाद डेटा एनालिसिस से पारदर्शिता बढ़ सकती है।मगर सिर्फ तकनीक के भरोसे परीक्षा व्यवस्था की खामियां दूर नहीं होंगी। नीट-यूजी मामले की जांच में गोपनीयता बरतने में लापरवाही, अपर्याप्त सीसीटीवी निगरानी, जिम्मेदारियों का अस्पष्ट बंटवारा और अंतिम प्रश्नपत्र तक जरूरत से ज्यादा लोगों की पहुंच जैसी कमियां सामने आईं। यह और भी गंभीर है कि पेपर तैयार करने वाले विशेषज्ञों के आपसी संपर्क ने गोपनीयता के बुनियादी उसूल को ही तार-तार कर दिया।

लिहाजा प्रस्तावित कमांड सेंटर महज एक और अफसरशाही ढांचा न बने। उसे स्वतंत्र अधिकार, स्पष्ट जवाबदेही और गड़बड़ी की सूरत में परीक्षा रोकने का इख्तियार मिलना चाहिए। शिक्षा मंत्रालय और एनटीए को समझना होगा कि परीक्षा की निष्पक्षता कोई प्रशासनिक खानापूर्ति नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा अमानत है।अगर एनटीए भरोसे की इस कड़ी परीक्षा में नाकाम रहता है तो उसके भविष्य पर सख्त फैसला भी अपरिहार्य होगा। केंद्र के साथ राज्यों की परीक्षा एजेंसियों के लिए भी एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और मजबूत निगरानी ढांचा बनाया जाना चाहिए, ताकि मुल्क के नौजवानों को फिर यह भरोसा हो सके कि उनकी मेहनत किसी मुनाफाखोर गिरोह की चालाकी की भेंट नहीं चढ़ेगी।