डीके शिवकुमार ने ली कर्नाटक के मुख्यमंत्री की शपथ, जी परमेश्वर बने उप मुख्यमंत्री

DK Shivakumar
DK Shivakumar- फोटो : news4nation

कर्नाटक में नई सरकार के गठन का गठन हो गया है। कांग्रेस विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद डी.के. शिवकुमार बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह बेंगलुरु स्थित लोक भवन के ग्लास हाउस में आयोजित किया गया, जहां राज्यपाल थावरचंद गहलोत शाम 4 बजकर 5 मिनट पर उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ कुछ मंत्रियों को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने परमेश्वर को DKS कैबिनेट में डिप्टी CM बनाने की पुष्टि की है। वे दलित वर्ग से आते हैं। 


64 वर्षीय डी.के. शिवकुमार को कर्नाटक में वोक्कालिगा समुदाय के प्रभावशाली नेता के तौर पर माना जाता है।  कांग्रेस विधायक दल ने 30 मई को उन्हें अपना नेता चुना था, जिसके बाद से ही उनके मुख्यमंत्री बनने की औपचारिक घोषणा तय मानी जा रही थी। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं।

कौन हैं शिवकुमार 

कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बन रहे D. K. Shivakumar राज्य की राजनीति का एक बड़ा और प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। 64 वर्षीय शिवकुमार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और वोक्कालिगा समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनका पूरा नाम डोड्डालाहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार है। उनका जन्म 15 मई 1962 को कर्नाटक के कनकपुरा में हुआ था।

शिवकुमार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। वर्ष 1989 में वह पहली बार विधायक चुने गए और इसके बाद कई बार विधानसभा पहुंचे। कांग्रेस संगठन में उन्हें संकटमोचक नेता के रूप में भी जाना जाता है। साल 2019 में जब कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन संकट में था, तब उन्होंने पार्टी विधायकों को एकजुट रखने में अहम भूमिका निभाई थी।

कर्नाटक की राजनीति में डी.के. शिवकुमार को संगठन और रणनीति का मास्टर माना जाता है। वह ऊर्जा मंत्री और जल संसाधन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी संभाल चुके हैं। वर्ष 2020 में उन्हें कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया, जिसके बाद पार्टी को मजबूत करने में उनकी बड़ी भूमिका रही। अब मुख्यमंत्री के रूप में उनके सामने विकास, संगठन और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी।