सुधाकर सिंह की हिरासत पर विशेषाधिकार हनन का नोटिस ! स्पीकर को लिखा पत्र, नवादा में हुई थी कार्रवाई
सुधाकर सिंह के पत्र के मुताबिक, 26 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब एक बजे नवादा टाउन में जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक के आदेश एवं पर्यवेक्षण में काम कर रही जिला पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया।
Bihar News : बिहार के बक्सर से कांग्रेस सांसद सुधाकर सिंह ने नवादा में पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने इस कार्रवाई को अवैध बताते हुए लोकसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम 222 और 223 के तहत विशेषाधिकार प्रश्न की सूचना दी है। सांसद ने आरोप लगाया है कि उन्हें संसद के चालू सत्र में शामिल होने से रोकने के उद्देश्य से हिरासत में लिया गया। उन्होंने मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
संसद सत्र के दौरान हिरासत में लेने का आरोप
सुधाकर सिंह के पत्र के मुताबिक, 26 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब एक बजे नवादा टाउन में जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक के आदेश एवं पर्यवेक्षण में काम कर रही जिला पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया। सांसद ने दावा किया है कि इसके बाद उन्हें नवादा में ही रखा गया। उन्होंने पत्र में बताया कि संसद के सत्र में शामिल होने के लिए उनकी पटना से नई दिल्ली जाने वाली तेजस राजधानी एक्सप्रेस में टिकट बुक थी। ट्रेन 26 अक्टूबर को शाम 7:30 बजे पटना जंक्शन से रवाना होने वाली थी। उनके अनुसार, हिरासत का समय ऐसा था कि वे संसद पहुंचने के लिए निर्धारित यात्रा नहीं कर सके।
FIR और गिरफ्तारी का आधार नहीं
लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में सुधाकर सिंह ने कहा है कि उन्हें अब तक न तो प्राथमिकी (FIR) की प्रति दी गई है और न ही गिरफ्तारी मेमो, निरुद्धि आदेश या हिरासत के लिखित आधार उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ किसी संज्ञेय अपराध की जानकारी भी नहीं दी गई। सांसद ने अपनी हिरासत को संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के विपरीत बताते हुए संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर नवादा जिला प्रशासन और पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है।
नियम 229 का पालन नहीं करने का आरोप
सुधाकर सिंह ने पत्र में लोकसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम 229 का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि किसी सांसद को गिरफ्तार या निरुद्ध किए जाने की स्थिति में संबंधित प्राधिकारी को इसकी सूचना लोकसभा अध्यक्ष को तत्काल देनी होती है। इस सूचना में हिरासत के कारण और स्थान का विवरण भी शामिल होना चाहिए। सांसद ने दावा किया है कि उनकी जानकारी के अनुसार, नवादा के अधिकारियों ने इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को कोई सूचना नहीं भेजी है। उन्होंने इस मामले में बिहार सरकार के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक से तत्काल रिपोर्ट मंगाने की मांग की है।
पुलिस के खिलाफ मुद्दे उठाने के कारण कार्रवाई
पत्र में सुधाकर सिंह ने यह भी कहा है कि वह बिहार पुलिस के आचरण से जुड़े कई सार्वजनिक महत्व के मुद्दे संसद और पटना हाईकोर्ट के समक्ष उठाते रहे हैं। इनमें भारत भूषण तिवारी मुठभेड़ से संबंधित CWJC संख्या 11789/2026 का मामला भी शामिल है। उन्होंने नवादा में किसानों से जुड़े मुद्दे उठाने का भी उल्लेख किया है। सांसद ने आशंका जताई है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई प्रतिशोधात्मक हो सकती है और इसका उद्देश्य उन्हें सार्वजनिक मुद्दे उठाने से रोकना है। यह आरोप भी उनके पत्र का हिस्सा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
विशेषाधिकार समिति को मामला भेजने की मांग
सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि उनकी हिरासत का तत्काल संज्ञान लिया जाए और संबंधित अधिकारियों से नियम 229 के तहत रिपोर्ट तलब की जाए। उन्होंने नियम 222 के तहत विशेषाधिकार प्रश्न उठाने की अनुमति देने और नियम 227 के अंतर्गत मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने बिहार सरकार को आवश्यक निर्देश देने की अपील की है, ताकि वह तत्काल नई दिल्ली जाकर संसद की कार्यवाही में शामिल हो सकें और अपने संसदीय दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
सांसद के मुताबिक, उनके अधिवक्ता वी लॉ एसोसिएट्स, पटना ने भी 26 अक्टूबर को नवादा के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को व्हाट्सऐप के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा है। इसमें हिरासत के आधार स्पष्ट करने और नियम 229 के अनुपालन की मांग की गई है। अब इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष की ओर से की जाने वाली कार्रवाई और नवादा जिला प्रशासन का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।