डीजल-ATF पर बढ़ा एक्सपोर्ट टैक्स, क्या आम लोगों पर पड़ेगा असर? जानिए सरकार के नए नियम
केंद्र सरकार ने डीजल और ATF के एक्सपोर्ट टैक्स में बदलाव किया है। साथ ही रिटेल पंपों से डीजल खरीद पर 200 लीटर की सीमा लागू की गई है। जानिए नए नियम, कारण और आम लोगों पर इसका असर।
- Export Duty changes: देश में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता और सप्लाई को लेकर चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाले टैक्स में बदलाव किया है। इसके साथ ही डीजल की खरीद को लेकर भी कुछ अस्थायी नियम लागू किए गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या आम लोगों को डीजल-पेट्रोल की कमी का सामना करना पड़ेगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
सबसे पहले ATF को समझिए..
इसका पूरा नाम Aviation Turbine Fuel है।
इसका उपयोग जेट एयरक्राफ्ट और कुछ सैन्य विमानों में होता है।
यह सामान्य पेट्रोल या डीजल से अधिक शुद्ध और विशेष मानकों वाला ईंधन होता है।
ATF की कीमत बढ़ने पर एयरलाइंस की लागत बढ़ जाती है, जिसका असर हवाई टिकटों पर भी पड़ सकता है।
अब क्या बदला है?
केंद्र सरकार की नई अधिसूचना के अनुसार अब डीजल के एक्सपोर्ट पर 14 रुपये प्रति लीटर और ATF के एक्सपोर्ट पर 12.5 रुपये प्रति लीटर टैक्स लगाया जाएगा। पेट्रोल के एक्सपोर्ट टैक्स में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। नई दरें मंगलवार से लागू हो गई हैं।
सरकार हर 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों की समीक्षा करती है और उसी के आधार पर एक्सपोर्ट ड्यूटी तय की जाती है।
क्या देश में ईंधन की कमी है?
इस सवाल पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की कोई कमी नहीं है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल उपलब्ध है।
सरकार का कहना है कि यह कदम केवल घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने और किसी अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में देश के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है।
डीजल खरीदने वालों के लिए क्या नया नियम है?
सरकार ने 11 जून को एक अस्थायी आदेश जारी किया है, जिसके तहत अगले 90 दिनों तक कुछ नियम लागू रहेंगे।
कोई भी व्यक्ति रिटेल पेट्रोल पंप से एक दिन में 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं खरीद सकेगा।
औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अब अपना डीजल सीधे अपने उपभोक्ता पंपों (Consumer Pumps) से लेना होगा।
यह व्यवस्था फिलहाल 90 दिनों के लिए लागू की गई है।
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
हाल के दिनों में करीब 42 करोड़ लीटर डीजल, जो पहले सीधे कंपनियों को सप्लाई होता था, उसकी खरीद रिटेल पेट्रोल पंपों से होने लगी। इससे पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ी और आम ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
सरकार का मानना है कि बड़े उपभोक्ताओं की खरीद को नियंत्रित कर रिटेल पंपों पर दबाव कम किया जा सकता है, जिससे आम लोगों को ईंधन लेने में आसानी होगी।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है और यह कदम केवल सप्लाई मैनेजमेंट के लिए उठाया गया है। निजी वाहन चलाने वाले लोगों पर इन नियमों का कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट टैक्स बढ़ाने तथा डीजल खरीद पर अस्थायी सीमा लगाने का मकसद देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना और पेट्रोल पंपों पर भीड़ कम करना है। सरकार का दावा है कि यह कोई संकट की स्थिति नहीं है, बल्कि एहतियाती कदम है ताकि आम लोगों को पेट्रोल-डीजल के लिए परेशानी न उठानी पड़े।
ATF की खास बातें:
इसका पूरा नाम Aviation Turbine Fuel है।
इसका उपयोग जेट एयरक्राफ्ट और कुछ सैन्य विमानों में होता है।
यह सामान्य पेट्रोल या डीजल से अधिक शुद्ध और विशेष मानकों वाला ईंधन होता है।