Bihar Education News: शिक्षा विभाग का अनोखा कदम, हर घंटे बजेगी हाइड्रेशन बेल, घंटी बजे तो पानी पियो, स्कूलों में नया नियम हुआ लागू

Bihar Education News:अब स्कूलों में सिर्फ क्लास की घंटी ही नहीं, बल्कि वॉटर बेल भी बज रही है एक ऐसी पहल, जो बच्चों को हर घंटे पानी पीने की याददिहानी दिलाती है, ताकि वे डिहाइड्रेशन और गर्मी से होने वाली बीमारियों से सुरक्षित रह सकें।...

Water Bell in Bihar Schools to Beat Heatwave Hourly Alerts
स्कूलों में नया नियम हुआ लागू- फोटो : reporter

Bihar Education News: प्रचंड गर्मी और लू के कहर के बीच बिहार के शिक्षा महकमे ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने तालीम के साथ-साथ सेहत को भी तरजीह दी है। अब स्कूलों में सिर्फ क्लास की घंटी ही नहीं, बल्कि वॉटर बेल भी बज रही है एक ऐसी पहल, जो बच्चों को हर घंटे पानी पीने की याददिहानी दिलाती है, ताकि वे डिहाइड्रेशन और गर्मी से होने वाली बीमारियों से महफूज़ रह सकें। कटिहार जिले के कदवा प्रखंड स्थित उर्दू मध्य विद्यालय, रामपुर में यह ‘वॉटर बेल’ इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां बजने वाली यह घंटी न तो क्लास शुरू होने का इशारा देती है और न ही छुट्टी का, बल्कि यह बच्चों के लिए सेहत का पैगाम लेकर आती है। जैसे ही घंटी बजती है, छात्र-छात्राएं अपने बोतल उठाकर पानी पीते हैं—एक छोटा सा कदम, लेकिन बड़ी राहत।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक के मुताबिक, शिक्षा विभाग के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें हर घंटे वॉटर बेल बजाकर बच्चों को शुद्ध पानी पीने के लिए प्रेरित किया जाता है। उमस भरी गर्मी में यह पहल बच्चों को लू, चक्कर और कमजोरी जैसी परेशानियों से बचाने में कारगर साबित हो रही है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि यह सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिले के 1865 विद्यालयों में इस व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। यानी अब हर स्कूल में ‘वॉटर बेल’ बच्चों की सेहत की हिफाज़त का अलार्म बन चुकी है।

छात्र-छात्राएं भी इस पहल को लेकर खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि पहले वे पढ़ाई में इतना मशगूल हो जाते थे कि पानी पीना भूल जाते थे, लेकिन अब हर घंटे घंटी उन्हें खुद का ख्याल रखने की याद दिलाती है।

कुल मिलाकर, शिक्षा विभाग की यह पहल न सिर्फ इनोवेशन का नमूना है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि तालीम के साथ सेहत का ख्याल रखना कितना जरूरी है। बिहार का यह कदम अब दूसरे राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है।

रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह