Bihar Education पर बड़ा सवाल कई स्कूलों में बिजली, पानी और शौचालय तक नहीं
बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत चिंताजनक है। कई सरकारी स्कूलों में आज भी बिजली, पीने का साफ पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। इस ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए शिक्षा व्यवस्था की असली तस्वीर
Bihar की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने का कई दावे और कई प्रयास किये जा रहे है,विभाग बड़े पैमाने पर शिक्षको की नियुक्ति कर रही है जिससे स्कूल में शिक्षको की कमी से बच्चो की शिक्षा बाधित न हो ,तो वाही स्कूल को आधुनिक तरीके से भी बेहतर किया जा रहा विभाग का दावा है की सरकारी स्कूल के बच्चे भी आधुनिक तकनीक से जुड़ कर पढाई करे लेकिन सरकारी स्कूल हमेसा से सवालों के घेरे में है। एक तरफ सरकार डिजिटल क्लास और स्मार्ट स्कूल की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि आज भी कई सरकारी स्कूल बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक कई जिले में ऐसे स्कूल भी मौजूद हैं
जहां बिजली की सुविधा तक नहीं है बिजिली नही होने से बच्चे गर्मी में बिना पंखे से पढने को मजबूर है ,वही डिजिटल क्लासरूम में पढ़ना सपना बना रह रहा है , जहां बच्चों को पीने के लिए साफ पानी नहीं है इसके साथ स्वछता की बात करे तो कई स्कूल में शौचालय बने तो हैं, लेकिन या तो बंद पड़े हैं या गंदगी से भरे हैं यह तस्वीर शिक्षा व्यवस्था के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
शिक्षा या सिर्फ कागज़ी विकास?
सरकार की योजनाओं में डिजिटल क्लास रूम , स्मार्ट बोर्ड और हाईटेक शिक्षा की बातें की जा रही हैं, लेकिन कई विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं ही नदारद हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि— क्या पहले मूलभूत जरूरतें पूरी होंगी या सिर्फ योजनाओं के आंकड़े बढ़ते रहेंगे?
बच्चों की मुश्किलें इन हालातों में पढ़ने वाले बच्चे हर दिन संघर्ष कर रहे हैं। न बिजली, न पिने का साफ पानी यही वजह है की स्कूल में बच्चो की उपथिति कम रहती है बच्चो की ऊप्स्थिति बेहतर बनी रहे इसके लिए विभाग कई तरीके से बच्चो को प्रोत्साहित करती यहाँ तक की बच्चो परोत्साहन राशी के साथ पौष्टिक खाना स्कूल ड्रेस किताब तक देने की बात करती है लेकिजं पौष्टिक खाना पर भी सवाल उठता है ,बच्चो को न तो अच्छा खाना मिलता और मिलता भी है तो गन्दा खाना जो बच्चे खाने से बीमार हो सकते है
बड़ा सवाल सरकार से
शिक्षा विभाग के दावों और जमीन की हकीकत में इतना बड़ा अंतर क्यों है कई बार सरकारी स्कूल में मिलने वाले मिड डे मिल पर सवाल उठे,ख़राब और बच्चे के सेहत पर बुरा असर होने वाले खाने की विडियो सामने आया? और जब मीडया या समाचार पत्रों से विभाग को शिकायत की जानकारी मिलती है तो करवाई क्या होती है या होती है इसका जिम्मेवार कौन है
शिक्षा व्यवस्था की यह तस्वीर सिर्फ चिंता नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। जब तक हर स्कूल में बिजली, पानी और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित नहीं होंगी, तब तक “डिजिटल शिक्षा” का सपना अधूरा ही रहेगा।