Bihar Board Exam: बिहार बोर्ड के छात्रों के लिए जरूरी खबर! अब याद करने के बजाय समझकर देना होगा परीक्षा

Bihar Board Exam: बिहार बोर्ड की परीक्षाओं में अब रटने के बजाय समझ और विश्लेषण पर जोर होगा। नई शिक्षा नीति के तहत सत्र 2027-28 से दक्षता आधारित सवालों का अभ्यास कराया जाएगा।

Bihar Board Exam

Bihar Board Exam:  बिहार बोर्ड की परीक्षाओं में अब केवल रटकर जवाब देने से काम नहीं चलेगा। नई शिक्षा नीति के तहत बाल वाटिका से लेकर 12वीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्रों के स्वरूप में बदलाव किया जाएगा। परीक्षा में ऐसे सवाल पूछे जाएंगे, जिनसे विद्यार्थियों की विषयों पर पकड़, आलोचनात्मक सोच और सीखे गए ज्ञान को वास्तविक जीवन में इस्तेमाल करने की क्षमता का आकलन हो सकेगा।


इसी बदलाव की तैयारी के लिए मंगलवार को पटना के एक स्थानीय होटल में एनसीईआरटी के परख की ओर से पांच दिवसीय कार्यशाला शुरू की गई। इसमें बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, एससीईआरटी और चुने गए 110 मास्टर ट्रेनर हिस्सा ले रहे हैं। परख के रिसोर्स पर्सन अमनदीप ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत अब तक देश के 27 शिक्षा बोर्डों में काम पूरा हो चुका है। बिहार देश का 28वां शिक्षा बोर्ड है, जहां मंगलवार से यह कार्यशाला शुरू हुई है।


देशभर के शिक्षा बोर्डों के लिए बनेगा एक समान प्रश्न बैंक


अमनदीप के अनुसार, फिलहाल 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में लगभग तय पैटर्न पर सवाल पूछे जाते हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए भी पिछले तीन से पांच वर्षों के सवालों को आधार बनाया जाता है। नई शिक्षा नीति के तहत इस व्यवस्था को बदलने की तैयारी है। अब प्रश्नपत्रों को पूरी तरह दक्षता आधारित बनाने पर जोर दिया जाएगा।


इसके लिए देशभर के शिक्षा बोर्डों के लिए एक समान प्रश्न बैंक तैयार किया जा रहा है। इसमें अलग-अलग तरह के सवाल और उनकी प्रकृति से जुड़ी जानकारी होगी। राज्य के बोर्ड इस प्रश्न बैंक की मदद से सवाल तैयार करने के नए तरीके समझ सकेंगे। आने वाले वर्षों में इस व्यवस्था को सभी शिक्षा बोर्डों की परीक्षाओं में लागू करने की योजना है।


रटने के बजाय समझ और विश्लेषण पर रहेगा जोर


पांच दिवसीय कार्यशाला में शिक्षकों को पढ़ाने और परीक्षा लेने के पुराने तरीकों में बदलाव के बारे में बताया जाएगा। उन्हें ऐसे सवाल तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिनसे यह पता चल सके कि विद्यार्थी किसी विषय को कितना समझते हैं और सीखी गई जानकारी का इस्तेमाल किस तरह कर सकते हैं।


इसमें विद्यार्थियों की विश्लेषण करने की क्षमता, आलोचनात्मक सोच और वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझकर उनका हल निकालने की योग्यता पर ध्यान दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों की परीक्षाओं में भी सवालों को ज्यादा उपयोगी और दक्षता आधारित बनाना है। इससे बिहार बोर्ड के विद्यार्थियों को दूसरे राज्यों के शिक्षा बोर्डों के विद्यार्थियों के समान शैक्षणिक स्तर हासिल करने में मदद मिल सकती है।


सत्र 2027-28 से कक्षाओं में दिखेगा बदलाव


राज्य के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से विद्यार्थियों को दक्षता आधारित सवालों का अभ्यास कराया जाएगा। कक्षाओं में भी शिक्षक बच्चों की समझ और योग्यता के अनुसार सवाल पूछेंगे। कार्यशाला में मास्टर ट्रेनरों को मूल्यांकन के नियमों और मानकों की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग शिक्षा बोर्डों में मूल्यांकन की प्रक्रिया को एक समान और व्यवस्थित बनाना है।


ओएमआर और डिजिटल टूल्स का भी मिलेगा प्रशिक्षण


कार्यशाला में मास्टर ट्रेनरों को ओएमआर शीट और डिजिटल टूल्स के इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसमें ओएमआर शीट भरने, डेटा मैपिंग और डिजिटल माध्यमों से जुड़े कामों की जानकारी दी जाएगी। इससे विद्यार्थियों से संबंधित आंकड़ों को सही और पारदर्शी तरीके से जुटाने में मदद मिलेगी। पांच दिवसीय प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जिलों में जाकर दूसरे शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। इस तरह नई परीक्षा प्रणाली और सवाल तैयार करने के नए तरीकों को राज्य के सरकारी स्कूलों तक पहुंचाने की योजना है।