Sharad Navratri Mahashtami: महाष्टमी पर माँ महागौरी के दिव्य दर्शन से बरसती है धन-ऐश्वर्य की वर्षा, समस्त पापों का होता है महाविनाश

Sharad Navratri Mahashtami: शरदीय नवरात्र के इस पावन एवं पवित्र अनुष्ठान के अष्टम दिवस पर जगत जननी माँ दुर्गा के अष्टम विग्रह, श्वेतवर्णा और करुणा की प्रतिमूर्ति माँ महागौरी की अलौकिक आराधना हो रही है।...

Navratri Day 8 Rituals
महाष्टमी पर माँ महागौरी की आराधना- फोटो : social Media

Sharad Navratri Mahashtami:  शरदीय नवरात्र के इस पावन एवं पवित्र अनुष्ठान के अष्टम दिवस पर जगत जननी माँ दुर्गा के अष्टम विग्रह, श्वेतवर्णा और करुणा की प्रतिमूर्ति माँ महागौरी की अलौकिक आराधना हो रही है। माँ महागौरी का यह सौम्य एवं पावन रूप चराचर जगत के सभी प्राणियों के लिए कल्याणकारी है। मान्यता है कि अष्टम दिवस पर माँ महागौरी के स्मरण और पूजन मात्र से साधक के जीवन के समस्त दैहिक, दैविक और भौतिक तापों का शमन हो जाता है तथा जन्म-जन्मांतर के संचित पाप विनष्ट हो जाते हैं।

धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, देवी महागौरी का सीधा संबंध दैदीप्यमान ग्रह 'शुक्र' से है। इनकी कृपा से जातकों के कुंडली जनित ग्रह-दोष शांत होते हैं तथा जीवन में अपार धन, ऐश्वर्य, वैभव और भौतिक सुखों का प्रादुर्भाव होता है। विशेष रूप से कला, अभिनय, गायन और नृत्य जैसे रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े साधकों के लिए माँ की आराधना अप्रतिम सफलता के द्वार खोलती है। इसके अतिरिक्त, वैवाहिक जीवन की बाधाओं को दूर करने और सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए भी महागौरी का पूजन अत्यंत फलदायी माना गया है। त्रेतायुग में माता सीता ने भी श्रीराम की प्राप्ति हेतु इसी महाशक्ति की आराधना की थी।

आज महाष्टमी के इस मंगल अवसर पर संपूर्ण वातावरण माँ के जयकारों और मंत्रोच्चार से गुंजायमान है। श्रद्धालु अपनी अंतःकरण की शुद्धि, एकाग्रता की वृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा के संचार के साथ माँ के चरणों में शीश नवाकर अपने जीवन को कृतकृत्य कर रहे हैं।