Anant Chaturdashi: अनंत कृपा का पावन पर्व आज, रवियोग में होगी श्रीहरि की आराधना, चौदह गांठों में छिपा है चौदह लोकों का ये दिव्य रहस्य

Anant Chaturdashi: सृष्टि के चौदह लोकों से बताया गया है। तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, मह, जन, तप और सत्य इन चौदह लोकों के संरक्षण एवं पालन के लिए भगवान के अनंत स्वरूप की महिमा का वर्णन मिलता है।...

Anant Chaturdashi Today Worship Lord Vishnu Under Ravi Yog
अनंत कृपा का पावन पर्व आज- फोटो : social Media

Anant Chaturdashi: भाद्रपद शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि आज श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक साधना के मध्य अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाई जा रही है। सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की उपासना के लिए अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।मान्यता है कि  आज विधिपूर्वक व्रत, पूजन, कथा-श्रवण और अनंत सूत्र धारण करने से साधक को श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। ज्योतिषीय दृष्टि से भी आज का दिन विशेष है। दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र विद्यमान रहेगा, इसके पश्चात संपूर्ण दिवस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। साथ ही आज रवियोग का भी सुयोग बन रहा है। ऐसे में श्रद्धालु प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर संकल्पपूर्वक भगवान विष्णु की आराधना करेंगे। पूजन में पीले और गुलाबी पुष्पों में सुगंधित इत्र मिलाकर अर्पित करने की परंपरा है। इसके साथ नैवेद्य में विविध मधुर पकवान अर्पित कर श्रीहरि का स्मरण किया जाएगा।

चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र है विशेष

अनंत चतुर्दशी की पूजा में चौदह गांठों वाले अनंत सूत्र का विशेष महत्व है। धार्मिक परंपरा में इन चौदह गांठों को चौदह लोकों का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि अनंत सूत्र की प्रत्येक गांठ में भगवान विष्णु के विभिन्न दिव्य नामों का स्मरण एवं पूजन किया जाता है। क्रमशः अनंत, पुरुषोत्तम, ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, वैकुण्ठ, श्रीधर, त्रिविक्रम, मधुसूदन, वामन, केशव, नारायण, दामोदर और गोविन्द के स्वरूप का आवाहन किया जाता है।

पूजा एवं कथा-श्रवण के पश्चात पुरुष अनंत सूत्र को दाहिनी भुजा में और स्त्रियां बाईं भुजा में धारण करती हैं। लोकमान्यता है कि यह सूत्र भगवान विष्णु के संरक्षण और अनंत कृपा का प्रतीक है। महिलाएं सौभाग्य, ऐश्वर्य, पारिवारिक सुख एवं समृद्धि की कामना से इस व्रत का अनुष्ठान करती हैं।

चौदह लोकों से जुड़ा है अनंत स्वरूप

पौराणिक आख्यानों में भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का संबंध सृष्टि के चौदह लोकों से बताया गया है। तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, मह, जन, तप और सत्य इन चौदह लोकों के संरक्षण एवं पालन के लिए भगवान के अनंत स्वरूप की महिमा का वर्णन मिलता है।इसी कारण अनंत चतुर्दशी को भगवान विष्णु की आराधना, व्रत और अनंत सूत्र धारण करने का पर्व माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धापूर्वक अनंत व्रत करने से संकटों से रक्षा, मनोकामना पूर्ति तथा धन-धान्य एवं सुख-संपदा की प्राप्ति होती है।

विष्णु सहस्रनाम के पाठ से पुण्यफल की कामना

अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत के साथ श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। श्रद्धालु भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए दीप प्रज्वलित करेंगे, कथा का श्रवण करेंगे और सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करेंगे। शास्त्रीय मान्यता में अनंत व्रत की दीर्घकालिक साधना का विशेष महत्व बताया गया है और चौदह वर्षों तक विधिपूर्वक व्रत करने को अत्यंत पुण्यफलदायी माना गया है।

इस पावन अवसर पर मंदिरों एवं घरों में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के साथ ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप किया जाता है । श्रद्धालु अनंत प्रभु से परिवार की सुख-शांति, आरोग्य, समृद्धि, संतान-सुख और समस्त विघ्नों के निवारण की प्रार्थना करते हैं। अनंत चतुर्दशी का यह पर्व भक्तों को यह संदेश देता है कि श्रद्धा, संयम और धर्माचरण के साथ श्रीहरि का स्मरण जीवन को आध्यात्मिक शक्ति और आशा से परिपूर्ण करता है।

हीरेश कुमार