Today Panchang 15 may 2026: आज का धार्मिक पंचांग! जानें शुभ और अशुभ समय की पूरी जानकारी

Today Panchang 15 may 2026: पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग, राहुकाल, गुलिक काल और वृषभ संक्रांति की पूरी जानकारी लें, जो 15 मई 2026 के संबंध में दिया गया है.

Today Panchang 15 may 2026
आज का पंचांग अपडेट- फोटो : freepik

Today Panchang 15 may 2026: 15 मई 2026 ई. की अंग्रेजी तारीख शुक्रवार के दिन पड़ रही है। इस दिन सूर्य उत्तरायण में रहेगा और उत्तर गोल में अपनी स्थिति बनाएगा। यह समय वसंत ऋतु का है। पूरे दिन चंद्रमा मेष राशि में ही गोचर करेगा, यानी उसका चलन मेष राशि में रहेगा। इस दिन राहुकाल सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजे तक रहेगा। इस समय कोई भी नया या शुभ काम शुरू करना ठीक नहीं माना जाता। सुबह 7 बजकर 30 मिनट से 9 बजे तक गुलिक काल रहेगा। इसके अलावा दोपहर 3 बजकर 30 मिनट से 4 बजकर 30 मिनट तक यमगंड रहेगा। इन समयों में भी शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

इस दिन तिथि की बात करें तो त्रयोदशी तिथि सुबह 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी। नक्षत्र के अनुसार, दिन में चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में रहेगा और यह नक्षत्र रात 8 बजकर 14 मिनट तक चलेगा। इसके बाद भरणी नक्षत्र शुरू होगा। योग की स्थिति में दोपहर 2 बजकर 21 मिनट तक आयुष्मान योग रहेगा। इसके बाद सौभाग्य योग शुरू हो जाएगा। करण की बात करें तो सुबह 8 बजकर 31 मिनट तक वणिज करण रहेगा, और उसके बाद विष्टि यानी भद्रा करण शुरू हो जाएगा।

अश्विनी नक्षत्र के देवता कौन है?

अश्विनी नक्षत्र मेष राशि के 13 अंश 20 कला से लेकर 26 अंश 40 कला तक फैला होता है। इस नक्षत्र के स्वामी शुक्र देव माने जाते हैं और राशि स्वामी मंगल देव हैं। इस नक्षत्र के देवता यमराज माने गए हैं, जिन्हें न्याय का देवता कहा जाता है। इसका प्रतीक योनि माना जाता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग जिम्मेदार, अपने कर्तव्यों को निभाने वाले और अपने सिद्धांतों पर चलने वाले होते हैं। ये लोग गंभीर स्वभाव के होते हैं और अनुशासन पसंद करते हैं। सच बोलना और गलत चीजों का विरोध करना इनकी खास पहचान होती है। ये अपने जीवन में व्यवस्था और नियंत्रण बनाए रखना पसंद करते हैं।

वृषभ संक्रांतिस किसे कहते हैं?

वृषभ संक्रांति भी इसी दिन, यानी 15 मई 2026 शुक्रवार को पड़ रही है। इस दिन सुबह 5 बजकर 30 मिनट से 6 बजकर 28 मिनट तक पुण्य काल और महा पुण्य काल रहेगा। इस समय को बहुत शुभ माना जाता है। हिंदू सौर कैलेंडर के अनुसार जब सूर्यदेव वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे वृषभ संक्रांति कहा जाता है। यह समय दूसरे सौर महीने की शुरुआत माना जाता है। इस दिन स्नान, दान और अच्छे कार्यों का विशेष महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूर्यदेव की कृपा से जीवन में अच्छी ऊर्जा आती है और सकारात्मक बदलाव होते हैं।

मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए

इस दिन का उपाय बताया गया है कि मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए और उन्हें सफेद मिठाई का भोग लगाना चाहिए। साथ ही वृषभ संक्रांति के दिन सूर्य देव को जल अर्पित करना और जरूरतमंद लोगों को दान देना बहुत शुभ माना जाता है। इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बढ़ती है।