धर्म परिवर्तन करने वाले हिंदू को नहीं मिलेगा आरक्षण... सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हिंदू धर्म छोड़ने वालों को बड़ा झटका दिया. धर्मांतरण करने के बाद अन्य धर्म के लोगों के लिए मौजूद आरक्षण व्यवस्था का लाभ ऐसे लोगों को नहीं मिलेगा.

Supreme Court Ruling on reservation
Supreme Court Ruling on reservation- फोटो : news4nation

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति की सामाजिक पिछड़ेपन की स्थिति हिंदू सामाजिक व्यवस्था से दूसरे धर्म की सामाजिक व्यवस्था में धर्म परिवर्तन के साथ अपने आप स्थानांतरित नहीं हो सकती। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस्लाम धर्म अपनाने से कोई व्यक्ति तमिलनाडु में अधिसूचित सात पिछड़े वर्गों में शामिल नहीं हो जाता और न ही उसे सिर्फ धर्म परिवर्तन के आधार पर पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) श्रेणी में आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है।


जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने तमिलनाडु सरकार की याचिका खारिज करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया था, जिसके तहत धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बने लोगों को आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था।


सिर्फ धर्म परिवर्तन से नहीं मिलेगा आरक्षण

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस्लाम धर्म अपनाने मात्र से कोई व्यक्ति राज्य में अधिसूचित सात पिछड़े वर्गों की सामाजिक समुदाय श्रेणियों में शामिल नहीं हो जाता। अदालत के मुताबिक, किसी व्यक्ति की पूर्व जातिगत स्थिति को सीधे मुस्लिम पिछड़ा वर्ग श्रेणी में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। इसी तरह, कोई निजी धार्मिक संस्था भी किसी व्यक्ति के आरक्षण के पात्र होने की स्थिति को अंतिम रूप से निर्धारित नहीं कर सकती। शीर्ष अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि इसमें दखल देने का कोई आधार नहीं है।


तमिलनाडु सरकार की याचिका खारिज

तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। राज्य सरकार की अपील में कहा गया था कि हाईकोर्ट के फैसले से विशेषज्ञ वैधानिक आयोग की सिफारिशों के आधार पर बनाई गई कार्यकारी नीति में हस्तक्षेप की सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठते हैं।


सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को अदालत ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी और हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। इस फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर मुस्लिम पिछड़ा वर्ग श्रेणी में आरक्षण का दावा नहीं किया जा सकता।