भाजपा में शामिल हुए सात राज्यसभा सांसदों की जाएगी सदस्यता ! बागियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में आप
राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक समेत हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल ने आप से बगावत कर भाजपा का दामन थामा है
AAP : आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है, जब उसके सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का ऐलान कर दिया। इनमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक समेत हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं। राघव चड्ढा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से भटक गई है, जिसके चलते उन्होंने यह फैसला लिया।
इस घटनाक्रम के बाद राज्यसभा में AAP की संख्या घटकर महज तीन रह गई है, जिससे पार्टी की संसदीय ताकत और आगामी चुनावी तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस बीच, सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इन सांसदों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराया जाएगा। संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, यदि किसी दल के दो-तिहाई सदस्य एक साथ किसी अन्य पार्टी में विलय करते हैं, तो इसे दल-बदल नहीं माना जाता और ऐसे सदस्यों पर अयोग्यता लागू नहीं होती।
AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 के बीजेपी में जाने से यह संख्या दो-तिहाई से अधिक हो जाती है। यानी नियमन और तकनीकी रूप से देखें तो फ़िलहाल आप के सातों सांसदों के लिए कोई वैसा खतरा नहीं दिखता जिससे उनकी राज्यसभा की सदस्यता जा सकती है। यही कारण है कि सभी सांसदों ने काफी उत्साह के साथ भाजपा का दामन थामा। उनके लिए फिलाहल ऐसी कोई मुश्किल नहीं है जिससे वे सांसद नहीं रह जाएंगे।
हालांकि, AAPके शीर्ष नेता अपने बागी सांसदों के इस तर्क से सहमत नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने शनिवार को कहा कि पार्टी राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर इन सातों सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग करेगी।
संजय सिंह ने कहा कि दल-बदल कानून लोकसभा और राज्यसभा में किसी भी तरह के विभाजन या गुटबाजी को मान्यता नहीं देता, चाहे वह दो-तिहाई बहुमत ही क्यों न हो। उन्होंने इन सांसदों का बीजेपी में शामिल होना “असंवैधानिक” और “अवैध” बताया और कहा कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।