महिला आरक्षण की बात लेकिन सबसे कम महिला सांसद भाजपा में, पीएम मोदी पर खूब बरसी महुआ मोइत्रा

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि भाजपा द्वारा महिला आरक्षण के नाम पर देश को भ्रमित किया जा रहा है. उन्होंने डेटा जारी कर पीएम मोदी को जोरदार तरीके से घेरा है.

Mahua Moitra slams PM Modi
Mahua Moitra slams PM Modi- फोटो : news4nation

Women MP in Loksabha : संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत महिला आरक्षण लागू करने के लिए लाया गया विधेयक लोकसभा में गिर गया. जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए के घटक दल इसे विपक्ष द्वारा महिलाओं को आरक्षण से वंचित करना बता रहे हैं, वहीं विपक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है. विपक्ष ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण की आड़ में देश के संघीय ढांचे को कमजोर करने की साजिश करार दिया है. विपक्ष का स्पष्ट कहना है कि जब 2023 में ही महिला आरक्षण पर बातें साफ हो गई हैं तो लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 करके ही महिला आरक्षण लागू करने की शर्त कैसे आ गई. यह सीधे तौर पर देश का नया चुनावी नक्शा खींचकर यानी परिसीमन के बहाने अपना सियासी फायदा भाजपा तलाश रही है. 


इस बीच, पश्चिम बंगाल के कृष्णा नगर से टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने शनिवार को कहा कि भाजपा द्वारा महिला आरक्षण के नाम पर देश को भ्रमित किया जा रहा है. उन्होंने एक डेटा जारी कर बताया है कि देश में सबसे ज्यादा सांसद होने के बाद भी सबसे कम महिला सांसद भाजपा के हैं. उन्होंने तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा- 'प्रिय नरेंद्रमोदी, लोकसभा में सभी पार्टियों में आपकी पार्टी में महिलाओं का प्रतिशत सबसे कम है. 543 सीटों के आधार पर महिला आरक्षण अभी लागू करें - आपको क्या रोक रहा है? जुमलाबाज़ी नहीं चलेगी.  


दरअसल, लोकसभा में महिला सांसदों की भागीदारी में भाजपा के सिर्फ 12.9% महिला सांसद हैं. वहीं कांग्रेस के 14.3%, टीएमसी के 37.9%, सपा के 13.5%, डीएमके के 13.6%, जदयू के 16.7% और लोजपा के 40% महिला सांसद शामिल हैं. भाजपा के लोकसभा सदस्यों की संख्या 240 है जिसमें सिर्फ 31 महिला सांसद हैं. वहीं कांग्रेस के 98 सांसदों में 14 महिला, टीएमसी के 29 सांसदों में 11 महिला, सपा के 37 सासंदों में 5 महिला, डीएमके के 22 सांसदों में 3 महिला, जदयू के 12 सांसदों में 2 महिला और लोजपा (रा) के 5 सांसदों में 2 महिला सांसद हैं. महुआ मोइत्रा ने इस आंकड़े को बताते हुए पूछा है कि आखिर सबसे कम महिला सांसदों का प्रतिशत भाजपा का ही क्यों है. 

दरअसल, संविधान के आर्टिकल 368 के मुताबिक संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है, यानी आधे से ज्यादा सदस्य सदन में मौजूद रहें और जितने सदस्य उपस्थित हैं, उनका दो-तिहाई बहुमत. कुल मिलाकर बिल पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए था। वोटिंग के दौरान लोकसभा में 528 सांसद मौजूद थे। इस हिसाब से बिल को पास कराने के लिए 352 वोट चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कराने में सफल नहीं होने के बाद सरकार ने परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर वोटिंग नहीं कराई.