Bihar Crime: मुजफ्फरपुर में पढ़ाई के नाम पर हॉस्टल में चल रहा था खतरनाक खेल,200 कारतूसों की सीवान में होनी थी डिलीवरी, सच जानकर दंग रह जाएंगे

Bihar Crime: मुजफ्फरपुर में जुर्म की एक और खौफनाक परत उस वक्त खुलकर सामने आई, जब पुलिस ने कारतूस तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।...

Muzaffarpur Hostel horror
हॉस्टल बना तस्करी का अड्डा- फोटो : social Media

Bihar Crime: मुजफ्फरपुर में जुर्म की एक और खौफनाक परत उस वक्त खुलकर सामने आई, जब पुलिस ने कारतूस तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। हैरत की बात ये है कि इस काले धंधे की जड़ें सीधे बिहार यूनिवर्सिटी के हॉस्टल तक पहुंच चुकी थीं, जहां पढ़ाई की आड़ में मौत का सामान छिपाकर रखा जा रहा था।

काजी मोहम्मदपुर थाना पुलिस को मिली एक खुफिया इत्तिला ने पूरे मामले का रुख बदल दिया। पुलिस ने फौरन जाल बिछाया और कलमबाग चौक स्थित हनुमान मंदिर के पास घेराबंदी कर दो संदिग्ध युवकों को दबोच लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से 200 जिंदा कारतूस बरामद हुए, जिसे वे शहर में कहीं सप्लाई करने की फिराक में थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सिवान निवासी अभिषेक तिवारी और सीतामढ़ी निवासी अनमोल कुमार के रूप में हुई है।

तहकीकात में जो खुलासा हुआ, उसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। एक आरोपी यूनिवर्सिटी के पीजी थर्ड हॉस्टल के कमरा नंबर 54 में अवैध रूप से रह रहा था और वहीं से इस तस्करी के धंधे को अंजाम दे रहा था। यानी तालीम के इस गढ़ में गुनाह का अड्डा पल रहा था।

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हॉस्टल के कमरे से पिस्टल का होल्स्टर और एक मैगजीन भी बरामद किया है, जो इस पूरे नेटवर्क की गहराई को बयां करता है। साथ ही एक मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है, जिसका इस्तेमाल सप्लाई के लिए किया जाता था। मामले को लेकर वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा ने बताया कि दोनों तस्कर बुलेट बाइक से कारतूस की बड़ी खेप लेकर लौट रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। उनके खिलाफ काजी मोहम्मदपुर थाना में कांड संख्या-123/26 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अभिषेक तिवारी पहले भी आर्म्स एक्ट के एक मामले में नामजद रह चुका है, जिससे साफ है कि ये गिरोह पहले से ही आपराधिक गतिविधियों में लिप्त था।फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने और इसके पीछे छिपे बड़े चेहरों को बेनकाब करने में जुटी है। शहर में इस खुलासे के बाद सनसनी फैल गई है क्योंकि अब सवाल ये है कि आखिर पढ़ाई के ठिकाने कब से गुनाह की मंडी बनने लगे?