Bihar Crime News: बहू-पोतों ने बुजुर्ग को पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट, रिश्तों में हीं हुआ खूनी हिसाब, ब्याज के चक्कर में बिखरा घर

Bihar Crime News: छोटे से झगड़े ने ऐसा खूनी रूप लिया कि बहू और पोतों ने मिलकर अपनी ही दादी को मौत के घाट उतार दिया।...

Munger Tragedy Elderly Woman Beaten to Death by Family
बहू-पोतों ने दादी को पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट- फोटो : reporter

Bihar Crime News:मुंगेर से एक ऐसी दरिंदगी सामने आई है, जिसने इंसानियत और रिश्तों दोनों को शर्मसार कर दिया। शामपुर थाना इलाके के लौहची गांव में पैसों के छोटे से झगड़े ने ऐसा खूनी रूप लिया कि बहू और पोतों ने मिलकर अपनी ही दादी को मौत के घाट उतार दिया। इस वारदात ने पूरे इलाके में सनसनी और खौफ का माहौल पैदा कर दिया है।

मृतका उर्मिला देवी  जो स्वर्गीय वासुदेव यादव की पत्नी थीं, अपने छोटे बेटे रणजीत यादव के साथ रहती थीं। वहीं, बड़ा बेटा राजीव यादव अपने परिवार के साथ पास ही रहता था। लेकिन इस घर के अंदर मोहब्बत नहीं, बल्कि पैसों का जहर पल रहा था।

सूत्रों के मुताबिक, उर्मिला देवी और उनकी बहू लाली देवी के बीच लंबे समय से पैसों को लेकर तनाव चल रहा था। मामला इतना संगीन था कि पहले भी कई बार झगड़े हो चुके थे। बताया जाता है कि उर्मिला देवी ने अपने बेटे से लिया पैसा वापस कर दिया था, लेकिन बहू तीन साल का ब्याज मांग रही थी और यही जिद इस खौफनाक अंजाम तक पहुंच गई।

रविवार की शाम यह विवाद जुबानी जंग से निकलकर खूनी हमला बन गया। आरोप है कि बहू लाली देवी ने अपने बेटों सचिन और अमरेश के साथ मिलकर उर्मिला देवी पर बेरहमी से हमला कर दिया। लाठी-डंडों और हाथों से की गई पिटाई में बुजुर्ग महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं और मौके पर ही दम तोड़ दिया।

घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया। रिश्तों के इस कत्ल की खबर आग की तरह फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बिना देर किए आरोपी बहू लाली देवी को गिरफ्तार कर लिया। बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। परिवार के ही पोते राजकुमार ने इस खूनी साजिश का खुलासा करते हुए कहा कि दादी की हत्या बड़ी मां और चचेरे भाइयों ने मिलकर की है। यानी घर के अंदर ही अपनों ने अपनों का खून बहाया। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की तहकीकात में जुटी है, लेकिन यह वारदात एक बड़ा सवाल छोड़ गई है क्या अब रिश्तों की कीमत सिर्फ पैसे और ब्याज तक सिमट गई है? 

रिपोर्ट - मणिभूषण शर्मा