जहानाबाद नीट छात्रा हत्याकांड : परिजनों ने जांच एजेंसियों और पुलिस की कार्रवाई पर जताया असंतोष, अब इंसाफ के लिए करेंगे यह काम
जहानाबाद की नीट छात्रा हत्याकांड मामले में परिजनों ने एजेंसियों और पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष जताया है। परिजन इंसाफ के लिए अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के आवास पर जाएंगे और जांच करने की गुहार लगाएंगे....
Jehanabad/Patna : पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली जहानाबाद की नीट (NEET) छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई से असंतुष्ट और आक्रोशित परिजनों ने मीडिया के सामने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। परिजनों ने बताया कि अब वे न्याय की गुहार लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं के आवास का रुख करेंगे। इसके साथ ही पीड़ित परिवार ने पुलिस, प्रशासन और सीबीआई (CBI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए 20 से अधिक तीखे प्रश्नों की एक सूची जारी की है और मामले में बड़े स्तर पर लीपापोती करने का आरोप लगाया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डॉक्टरों की भूमिका पर उठे सवाल, साक्ष्यों को मिटाने का आरोप
परिजनों ने सीधे तौर पर इलाज करने वाले अस्पतालों और डॉक्टरों को कटघरे में खड़ा किया है। उनका पहला सवाल है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के पूरे बदन पर नाखूनों के खरोंच और प्राइवेट पार्ट के क्षत-विक्षत होने की बात सामने आने के बावजूद, इलाज करने वाले सहज, प्रमात और मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों ने इन तथ्यों को क्यों छुपाया? परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद मुख्य आरोपी को बचाने के लिए शम्भू गर्ल्स हॉस्टल के उस कमरे को सील नहीं किया गया, बल्कि वहां से खून साफ कर और बेडशीट को धोकर अति महत्वपूर्ण साक्ष्यों को जानबूझकर गायब कर दिया गया।
पटना एसएसपी और तत्कालीन डीजीपी की कार्यशैली पर गंभीर आरोप
पीड़ित परिवार ने तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (DGP) और पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) की भूमिका पर भी बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही पटना एसएसपी ने इसे महज एक आत्महत्या का रूप क्यों दे दिया? उन्होंने आरोप लगाया कि 30 जनवरी को तत्कालीन डीजीपी ने उन्हें अपने आवास पर बुलाकर केस को आत्महत्या मान लेने और राजनीतिक रसूखदारों से मिलने का दबाव बनाया था। बात न मानने पर बेऊर मोड़ तक पीड़ित परिवार का पीछा कर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया गया है।
देर रात डीएनए सैंपल लेने और मोबाइल डेटा डिलीट करने पर आपत्ति
मीडिया से बातचीत के दौरान परिजनों ने जांच के तरीकों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मृतका के कपड़ों पर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य (स्पर्म) मिले थे, तो पीड़ित परिवार का डीएनए (DNA) सैंपल रात के 1 बजे क्यों लिया गया? क्या इसके जरिए परिवार को डराने का प्रयास किया जा रहा था? इसके अलावा, घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण मोबाइल फोन जब्त किए गए थे, लेकिन उन्हें समय पर सील नहीं किया गया और उनमें मौजूद सबूतों को डिलीट कर दिया गया। परिजनों ने पूछा कि 5 मिनट का सीसीटीवी (CCTV) फुटेज किसके इशारे पर वायरल किया गया और उसके साथ किसने छेड़छाड़ की, इसकी जांच अब तक क्यों नहीं हुई?
सीबीआई की जांच पर सवाल, समय पर चार्जशीट दाखिल न होने से मुख्य अभियुक्त को मिली जमानत
मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) पर भी परिजनों का गुस्सा फूटा। परिजनों का आरोप है कि अदालत द्वारा 10 अप्रैल को निर्धारित समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का आदेश दिए जाने के बावजूद सीबीआई ने जानबूझकर समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं की। इसी तकनीकी खामी के कारण अदालत को मजबूरन मुख्य अभियुक्त मनीष रंजन को जमानत देनी पड़ी। परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि बच्ची के नाबालिग होने के बावजूद इस मामले में पोक्सो एक्ट (POCSO Act) की धाराएं क्यों नहीं जोड़ी गईं और अभियुक्तों के कॉल डिटेल्स तथा हॉस्टल के पास का सेल फोन डंप डेटा क्यों नहीं खंगाला गया?
'बेटी को न्याय दिलाने के लिए समाज आए आगे, यह संपूर्ण समाज की लड़ाई'
परिजनों ने भावुक और आक्रोशित होते हुए कहा कि अगर नीट छात्रा मामले की निष्पक्ष जांच शुरुआत में ही हो जाती, तो राज्य में बेटियों के साथ होने वाली अन्य अप्रिय घटनाओं को रोका जा सकता था। उन्होंने हॉस्टल संचालक मनीष रंजन द्वारा हॉस्टल के मालिकाना हक के कागजात अदालत से छुपाने पर भी सवाल दागे और पूछा कि इस अवैध संपत्ति पर प्रशासन का बुलडोजर कब चलेगा? पीड़ित परिवार ने समाज के सभी वर्गों से एक साथ आकर आवाज बुलंद करने की अपील की है ताकि भविष्य में किसी और की बेटी के साथ ऐसा खौफनाक अपराध न हो।
रणजीत की रिपोर्ट