Bihar crime:जिसे रोकना था शराब की तस्करी, वही बन गए धंधेबाज, दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार, विभाग में मचा हड़कंप

Bihar crime: शराब के रक्षक ही शराब के भक्षक बन गए है। शराबबंदी वाले बिहार में शराबबंदी कानून को लागू कराने वाली पुलिस ही अब शराब तस्करी के आरोप में गिरफ्त में आ गई है।

Bihar  police

Bihar crime:गोपालगंज में जिस वर्दी को कानून का सबसे मजबूत पहरेदार माना जाता है, वही वर्दी अब सवालों के कटघरे में खड़ी हो गई है। शराबबंदी वाले बिहार में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रक्षक और भक्षक की पुरानी कहावत को फिर से जिंदा कर दिया है। गोपालपुर थाना क्षेत्र में वाहन जांच के दौरान पुलिस ने 333 लीटर शराब के साथ दो पुलिसकर्मियों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

जिनके कंधों पर कानून का बोझ था, वही अब कानून के शिकंजे में हैं। गिरफ्तार जवानों की पहचान अमित कुमार और राहुल कुमार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों निजी वाहन से शराब की खेप लेकर जा रहे थे, तभी नियमित जांच के दौरान उनकी पोल खुल गई। और फिर जो हुआ, वह पूरे पुलिस महकमे के लिए “कड़वा सच” बन गया।

सूत्रों के मुताबिक राहुल कुमार की तैनाती डीआईयू में थी, जबकि अमित कुमार पहले एक विधायक के बॉडीगार्ड रह चुके हैं और वर्तमान में डायल 112 सेवा में प्रतिनियुक्त थे। यानी वर्दी के भीतर भी अलग-अलग जिम्मेदारियों की परतें थीं, लेकिन इस बार परतों के नीचे “तस्करी” का खेल निकल आया।

स्थानीय सूत्रों की मानें तो वाहन को जब रोका गया, तो किसी को उम्मीद नहीं थी कि अंदर बैठे लोग खुद पुलिस के सिपाही होंगे। लेकिन जैसे ही तलाशी हुई, शराब की पेटियां बाहर आईं और सारा सच सामने आ गया। यह भी सामने आया है कि अमित कुमार पहले भी विवादों में रह चुका है और हर्ष फायरिंग के मामले में सस्पेंड हो चुका था। यानी यह पहला मौका नहीं था जब उसकी वर्दी पर सवाल उठे हों, लेकिन इस बार मामला सीधा शराब तस्करी से जुड़ गया।

प्रांजल ने पुष्टि की कि दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही विभागीय जांच भी तेज कर दी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह सिर्फ व्यक्तिगत अपराध है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।पुलिस अब इस बात की तह तक जाने में जुटी है कि शराब की यह खेप कहां से लाई गई थी और आखिर किसे सप्लाई की जानी थी। शुरुआती जांच में यह भी शक जताया जा रहा है कि इस धंधे में और लोग भी शामिल हो सकते हैं।

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि जब कानून के रक्षक ही कानून तोड़ने लगें, तो “शराबबंदी” जैसी नीतियों की जमीनी हकीकत कितनी मजबूत रह जाती है। फिलहाल पूरा पुलिस महकमा इस शर्मनाक खुलासे से सकते में है और जांच के अगले मोड़ का इंतजार किया जा रहा है।

रिपोर्ट  नमों नारायण मिश्रा