UPI MDR 2026: 15 अक्टूबर से ATM में ज्यादा कैश रखने का आदेश वाला दावा फर्जी? जानें RBI और वित्त मंत्रालय की असली जानकारी
UPI MDR 2026: UPI MDR को लेकर वायरल दावा कि 15 अक्टूबर के बाद RBI और वित्त मंत्रालय ने ATM में ज्यादा कैश रखने का आदेश दिया है, फर्जी बताया गया है। जानें UPI चार्ज के नए नियम और असली जानकारी।
UPI MDR 2026: UPI को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया और कुछ खबरों में कई तरह के दावे सामने आ रहे हैं। इसी बीच एक खबर में दावा किया गया कि 15 अक्टूबर 2026 से UPI पर MDR लागू होने के बाद लोगों के कैश निकालने की जरूरत बढ़ सकती है। इसलिए RBI और वित्त मंत्रालय ने बैंकों को ATM में पर्याप्त कैश रखने के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से इस दावे को फर्जी बताया गया है।
PIB Fact Check के मुताबिक, RBI या वित्त मंत्रालय ने बैंकों को ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया है कि 15 अक्टूबर से UPI MDR लागू होने के बाद सभी ATM को अतिरिक्त कैश से भरकर रखा जाए। इसलिए ATM में कैश भरने से जुड़े इस दावे को सही खबर मानकर शेयर नहीं करना चाहिए।
The headline of a newspaper clipping published by @livemint claims that banks have been asked to stock up ATMs ahead of UPI fee roll out.#PIBFactCheck:
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) September 23, 2026
❌ The claim being made in the headline is #fake .
✅ No such instructions have been issued by @RBI or the @FinMinIndia to… pic.twitter.com/Gexp0l0cdC
UPI पर क्या बदलने वाला है?
15 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार ने नए UPI MDR फ्रेमवर्क की जानकारी दी थी। इसके तहत कुछ तय P2M यानी Person-to-Merchant लेन-देन पर MDR लागू होगा। ₹2,000 से अधिक के ऐसे पात्र लेन-देन पर सामान्य तौर पर 0.4 प्रतिशत MDR तय किया गया है। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आम लोगों को UPI से पैसे भेजने पर शुल्क देना होगा। P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया गया UPI पेमेंट पूरी तरह मुफ्त रहेगा, चाहे रकम कितनी भी हो। ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान भी MDR से बाहर हैं।
ग्राहक को सीधे नहीं देना होगा MDR
सरकार ने यह भी साफ किया है कि MDR ग्राहक से लिया जाने वाला शुल्क नहीं है। यह पेमेंट सिस्टम में व्यापारी पक्ष से जुड़ा शुल्क है और बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर तथा UPI ऐप से जुड़े दूसरे हिस्सेदारों के बीच बांटा जाता है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि व्यापारी MDR की रकम ग्राहक से अलग से न वसूलें। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M लेन-देन भी इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।
छोटे दुकानदारों को भी राहत
छोटे व्यापारियों के लिए भी जीरो-MDR की व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के अनुसार P2PM कैटेगरी में QR कोड के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों के लेन-देन पर MDR नहीं लगेगा। इसका मतलब है कि सड़क किनारे सामान बेचने वाले छोटे दुकानदारों, मोहल्ले की दुकानों और छोटे कारोबारियों पर इस बदलाव का असर सीमित रखा गया है।
ATM में कैश बढ़ाने का दावा क्यों गलत है?
वायरल खबर में UPI MDR और ATM में कैश की उपलब्धता को आपस में जोड़कर दावा किया गया। लेकिन PIB Fact Check के अनुसार RBI या वित्त मंत्रालय की ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है कि UPI MDR लागू होने के कारण बैंकों को ATM में अतिरिक्त कैश रखना होगा। इसलिए केवल UPI MDR की घोषणा को आधार बनाकर यह कहना कि देशभर के ATM को ज्यादा कैश से भरने का सरकारी आदेश जारी हुआ है, सही नहीं है।
हर UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा चार्ज
UPI को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम इस बात पर है कि क्या 15 अक्टूबर से हर भुगतान पर शुल्क लगेगा। सरकारी जानकारी के अनुसार ऐसा नहीं है। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले सभी UPI पेमेंट मुफ्त रहेंगे। ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर भी MDR नहीं लगेगा। इसके अलावा जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे व्यापारियों के भुगतान भी मुफ्त रहेंगे। कुछ जरूरी क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के पात्र P2M लेन-देन पर ₹5 प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट MDR तय किया गया है।
फर्जी खबरों से रहें सावधान
UPI से जुड़े नियमों में बदलाव के बीच सोशल मीडिया पर पुराने स्क्रीनशॉट, गलत खबरें और अधूरी जानकारी तेजी से फैल सकती है। इसलिए किसी भी वायरल दावे को आगे भेजने से पहले उसकी पुष्टि सरकारी स्रोतों से करना जरूरी है। किसी खबर में RBI, वित्त मंत्रालय, NPCI या सरकार का नाम होने मात्र से वह सही नहीं हो जाती। सरकारी योजनाओं और नीतियों से जुड़ी संदिग्ध खबरों की जानकारी PIB Fact Check के जरिए भी जांची जा सकती है।