Business News: डॉलर के मुकाबले औधे मुंह गिरा रुपया,तेल का तूफान में 92 के पार फिसली भारतीय मुद्रा, बाजार में मचा हड़कंप

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह हालात किसी आर्थिक दबाव से कम नहीं हैं। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, ऐसे में तेल महंगा होते ही डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपये पर दबाव साफ दिखाई देता है। ....

Rupee Crashes Past 92 vs Dollar Amid Oil Shock Markets Jitte
डॉलर के मुकाबले औधे मुंह गिरा रुपया- फोटो : X

Business News:  पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आए उछाल ने भारतीय अर्थव्यवस्था की धड़कन तेज कर दी है। सोमवार को कारोबार की शुरुआत होते ही रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले फिसलकर लगभग अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 46 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ करीब 92.28 प्रति डॉलर तक जा पहुंचा, जिससे कारोबारी हलकों में बेचैनी और अनिश्चितता का माहौल बन गया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.22 प्रति डॉलर पर खुला और देखते ही देखते और नीचे खिसक गया। बाजार के जानकारों का कहना है कि यह गिरावट अचानक नहीं आई, बल्कि इसके पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और महंगे होते कच्चे तेल का बड़ा हाथ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड करीब 116.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो लगभग 25 प्रतिशत की तेज छलांग है।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह हालात किसी आर्थिक दबाव से कम नहीं हैं। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, ऐसे में तेल महंगा होते ही डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपये पर दबाव साफ दिखाई देता है। बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं तो आने वाले दिनों में रुपया 93 प्रति डॉलर तक भी पहुंच सकता है।

सिर्फ रुपया ही नहीं, बल्कि एशिया की कई अन्य मुद्राएं भी सोमवार को कमजोर रहीं। डॉलर की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति मापने वाला डॉलर इंडेक्स भी करीब 0.66 प्रतिशत बढ़कर 99.64 पर पहुंच गया।

इस उथल-पुथल का असर शेयर बाजार पर भी साफ नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 2,345 अंक गिरकर 76 हजार के स्तर के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 708 अंक टूटकर 23,700 के करीब आ गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी है और हाल के कारोबारी सत्र में उन्होंने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।

कुल मिलाकर,तेल की बढ़ती कीमतें, मजबूत होता डॉलर और वैश्विक तनाव इन तीनों का तिहरा दबाव फिलहाल भारतीय बाजार और रुपये की चाल को प्रभावित कर रहा है। अब कारोबारियों की निगाह इस बात पर टिकी है कि अंतरराष्ट्रीय हालात कब तक संभलते हैं और भारतीय मुद्रा को राहत कब मिलती है।