LPG cooking gas supply: त्योहारों से पहले सरकारी कंपनियों ने बढ़ाया LPG उत्पादन, रोज 44 हजार टन आउटपुट
LPG cooking gas supply: त्योहारी सीजन में LPG की मांग बढ़ने के बीच सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू उत्पादन बढ़ाकर रोज करीब 44,000 टन कर दिया है। जानिए LPG सप्लाई और आयात पर इसका क्या असर होगा।
LPG cooking gas supply: त्योहारी सीजन शुरू होते ही देश में रसोई गैस यानी LPG की मांग बढ़ने लगी है। इसी को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियों ने LPG का घरेलू उत्पादन बढ़ा दिया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब पर्शियन गल्फ क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय LPG सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, सरकारी रिफाइनरियां फिलहाल रोज करीब 44,000 टन LPG का उत्पादन कर रही हैं। यह अगस्त के औसत उत्पादन से करीब 20 फीसदी ज्यादा है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से कंपनियां आयात पर अपनी निर्भरता कम करने और देश में LPG की उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं।
त्योहारी सीजन में क्यों बढ़ रही LPG की मांग?
भारत में सितंबर से त्योहारों का मौसम शुरू हो जाता है और यह सिलसिला नवंबर में दिवाली तक चलता है। इस दौरान घरों में खाना बनाने के साथ-साथ कई दूसरे घरेलू कामों के लिए भी LPG की जरूरत बढ़ जाती है। सर्दियों के दौरान भी आमतौर पर रसोई गैस की खपत बढ़ने की उम्मीद रहती है।
ग्रामीण परिवारों के लिए LPG रिफिल की अवधि को सरकार ने मार्च में 45 दिन कर दिया था। अब सप्लाई की स्थिति में सुधार के बाद यह अवधि घटाकर 25 दिन कर दी गई है। इससे उन उपभोक्ताओं को भी जरूरत के मुताबिक सिलेंडर दोबारा भरवाने में सुविधा मिल सकती है।
पर्शियन गल्फ संकट के बीच बढ़ाया गया उत्पादन
भारत अपनी LPG जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। खास तौर पर पर्शियन गल्फ क्षेत्र के देशों से होने वाला आयात भारतीय सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण रहा है। क्षेत्र में संघर्ष के कारण जब वहां से LPG की आपूर्ति प्रभावित हुई, तब भारत ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ दूसरे देशों से भी गैस मंगाने की कोशिश की। बाद में अमेरिका और अफ्रीकी देशों से LPG की सप्लाई बढ़ी। इसके अलावा ओमान के सोहर बंदरगाह के जरिए भी LPG की आपूर्ति शुरू हुई। इन स्रोतों से सप्लाई बेहतर होने के बाद घरेलू उत्पादन कुछ कम किया गया था। अब त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के कारण सरकारी कंपनियों ने फिर उत्पादन बढ़ा दिया है।
LPG आयात पर भारत की बड़ी निर्भरता
भारत दुनिया के बड़े LPG आयातक देशों में शामिल है और अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। पर्शियन गल्फ क्षेत्र से लंबे समय से भारत को LPG की बड़ी मात्रा मिलती रही है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव या सप्लाई में रुकावट का असर भारतीय बाजार पर पड़ सकता है। इसी वजह से घरेलू उत्पादन बढ़ाना कंपनियों के लिए सप्लाई को स्थिर रखने का एक महत्वपूर्ण कदम है। अलग-अलग देशों से LPG मंगाने के विकल्प बढ़ने से भी भारत को किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है।
पिछले साल के मुकाबले LPG की मांग कम
दिलचस्प बात यह है कि उत्पादन बढ़ाने के बावजूद इस साल LPG की कुल मांग पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 10 फीसदी कम बताई जा रही है। इसकी एक वजह उद्योगों में LPG की मांग का अभी पूरी तरह सामान्य नहीं होना है। संघर्ष के दौरान घरेलू उपभोक्ताओं के लिए LPG की सप्लाई को प्राथमिकता दी गई थी। उस समय औद्योगिक क्षेत्र में LPG की खपत कम हुई थी। अब तक इसमें पूरी तरह सुधार नहीं आया है, जिसके कारण कुल मांग पिछले साल की तुलना में कम बनी हुई है। हालांकि आने वाले महीनों में ठंड बढ़ने और त्योहारों के दौरान घरेलू खपत बढ़ने से LPG की मांग में तेजी आ सकती है। ऐसे में सरकारी तेल कंपनियां जरूरत के अनुसार घरेलू उत्पादन को और बढ़ा सकती हैं।