होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से नहीं रुकेगी रफ्तार; भारत के पास इतने सप्ताह का पर्याप्त ईंधन स्टॉक: हरदीप सिंह पुरी

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के बावजूद, सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों और 24 घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम के जरिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा किया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से नहीं रुकेगी रफ्तार; भारत के प

N4N Desk -: पश्चिम एशिया में युद्ध के बादलों के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत के पास अगले 25 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त कच्चा तेल और ईंधन भंडार मौजूद है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के बावजूद, सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों और 24 घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम के जरिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा किया है।

युद्ध की आहट के बीच भारत का सुरक्षा कवच

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और ईरान-इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। इस अनिश्चितता के माहौल में भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के पास किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में लगभग 25 दिनों की खपत के बराबर कच्चा तेल और इतने ही समय के लिए तैयार ईंधन का स्टॉक उपलब्ध है। कुल मिलाकर, यह भंडार देश की ऊर्जा जरूरतों को छह से आठ सप्ताह तक पूरा करने में सक्षम है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और सरकारी निगरानी

भारत के कच्चे तेल और एलपीजी आयात का लगभग आधा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है। ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण इस सामरिक मार्ग पर जहाजों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है। इस चुनौती को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने देशभर में आपूर्ति की निगरानी के लिए एक 'वार रूम' यानी 24 घंटे सक्रिय रहने वाला नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सरकार हर पल स्थिति की समीक्षा कर रही है ताकि आपूर्ति श्रृंखला में कोई बाधा न आए।

ऊर्जा स्रोतों में विविधता: भारत की नई ताकत

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मीडिया को आश्वस्त किया कि भारत अब केवल चंद स्रोतों पर निर्भर नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी ऊर्जा कूटनीति में बड़ा बदलाव करते हुए तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाई है। भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और चौथा सबसे बड़ा शोधक (Refiner) है। भारतीय कंपनियों ने अब ऐसे वैकल्पिक देशों के साथ अनुबंध किए हैं जिनकी आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के जोखिम भरे मार्ग से होकर नहीं गुजरती, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत हुई है।

कीमतों में उछाल और मुद्रास्फीति की चुनौती

भले ही भारत के पास तेल की भौतिक कमी न हो, लेकिन वैश्विक संघर्ष का सीधा असर तेल की कीमतों पर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2025 में भारत ने तेल आयात पर रिकॉर्ड 137 अरब डॉलर खर्च किए थे। कीमतों में यह बढ़ोतरी भारत के आयात बिल को बढ़ा सकती है, जिसका सीधा असर घरेलू मुद्रास्फीति और आम आदमी की जेब पर पड़ने की आशंका है। सरकार इस आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए कूटनीतिक और वित्तीय स्तर पर प्रयास कर रही है।

वैकल्पिक आपूर्ति और सरकार की प्राथमिकता

यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद हो जाता है, तो भारत ने अपनी 'प्लान बी' रणनीति तैयार कर ली है। इसके तहत पश्चिम अफ्रीका, लातिनी अमेरिका और अमेरिका जैसे क्षेत्रों से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई जाएगी। सरकार का कहना है कि उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और बाजार में कीमतों को स्थिर रखना है। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी वैश्विक संकट के बावजूद देश में ईंधन की किल्लत नहीं होने दी जाएगी।