कर्ज की किस्तों ने ली जान: बैंक कर्मियों की बदसलूकी से टूटी महिला ने की खुदकुशी, पति ने भी नहीं दिया साथ, मुजफ्फरपुर जैसी त्रासदी फिर दोहराई गई

बिहार के वैशाली में प्राइवेट बैंक कर्मियों और ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग आकर एक चार बच्चों की मां ने मौत को गले लगा लिया।

कर्ज की किस्तों ने ली जान: बैंक कर्मियों की बदसलूकी से टूटी

Vaishali - बिहार के वैशाली जिले के गोरौल थाना क्षेत्र के राजखंड गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ 30 वर्षीय दुर्गा देवी ने निजी बैंक कर्मियों और अपने ही परिवार की प्रताड़ना से तंग आकर खुदकुशी कर ली। मृतका के पिता अशोक महतो के अनुसार, दुर्गा ने करीब एक साल पहले एक लाख रुपये का कर्ज लिया था। एक किस्त जमा करने के बाद जब वह बाकी पैसे नहीं चुका पाई, तो बैंक कर्मियों ने उसके घर पहुँचकर गाली-गलौज और मानसिक प्रताड़ना शुरू कर दी, जिससे आहत होकर उसने गुरुवार की रात यह आत्मघाती कदम उठाया।

अपनों की बेरुखी और बैंक की गुंडागर्दी 

घटना की जड़ में न केवल बैंक का दबाव था, बल्कि परिवार का असहयोग भी शामिल रहा। बताया जा रहा है कि दुर्गा ने अपने पति पवन कुमार से किस्त के पैसे मांगे थे, लेकिन उसने साफ इनकार कर दिया। पिता का आरोप है कि पति के दबाव में ही दुर्गा ने लोन लिया था, लेकिन संकट के समय पति और ससुराल वालों ने उसे अकेला छोड़ दिया। गुरुवार की शाम जब बैंककर्मी विभा देवी, सोनम कुमारी और अरविंद कुमार उसके घर पहुँचे और सरेआम उसे अपमानित किया, तो वह इस मानसिक बोझ को सह नहीं सकी।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई: दो गिरफ्तार 

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। एसडीपीओ संजीव कुमार ने बताया कि मृतका के पिता द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर बैंककर्मी विभा देवी और अरविंद कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। एफआईआर में बैंक के तीन कर्मियों के अलावा पति, सास और ससुर को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। दुर्गा देवी अपने पीछे चार मासूम बच्चों (दो बेटे और दो बेटी) को छोड़ गई हैं, जिनमें सबसे बड़ा बेटा मात्र सात साल का है।

लोन के नाम पर 'मौत का समूह'

यह घटना बिहार में बढ़ते 'समूह लोन' और निजी माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के आतंक की याद दिलाती है। अभी कुछ ही समय पहले पड़ोसी जिले मुजफ्फरपुर के सकरा में एक पिता ने लोन की किस्तों से तंग आकर अपनी तीन मासूम बेटियों के साथ फांसी लगा ली थी। वहां भी जांच में यह बात सामने आई थी कि समूह के लोग किस्त न भरने पर उसे लगातार धमका रहे थे। वैशाली की घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कर्ज वसूली के हिंसक और अपमानजनक तरीके गरीब परिवारों के लिए काल बन रहे हैं।

सिस्टम और समाज पर बड़ा सवाल 

विशेषज्ञों का मानना है कि लोन रिकवरी के लिए आरबीआई (RBI) के सख्त नियमों के बावजूद निजी बैंक और उनके एजेंट जमीनी स्तर पर मर्यादाओं को ताक पर रख देते हैं। सरेआम गाली-गलौज और महिलाओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना अब आम होता जा रहा है। जब तक इन रिकवरी एजेंटों और उनके मालिकों पर कड़ी कानूनी नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक दुर्गा देवी जैसे मासूम लोग बलि चढ़ते रहेंगे। समाज को भी यह सोचना होगा कि क्या चंद रुपयों की किस्त किसी की जान से ज्यादा कीमती है?